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उत्तराखंडः कांग्रेस के 'मोहरों' से भाजपा की चुनावी जंग अब कांटे की

Mon, 23 Jan 2017 11:31 AM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
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हरीश रावत - फोटो : file photo
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तगड़े मंथन और जद्दोजहद के बाद कांग्रेस ने उत्तराखंड के 63 उम्मीदवारों की जो सूची जारी की है, उसमें बेशक बड़े चेहरे नहीं हैं, लेकिन चुनावी चौसर पर उतारे गए मोहरों से मुकाबला कांटे का हो जाने के आसार जरूर जताए जा रहे हैं। इसमें नए और बाहरी चेहरों से ताकत जुटाने की कोशिश दिखाई दे रही है। पार्टी ने एक भी नेता के रिश्तेदार को टिकट न देकर परिवारवाद पर घिरी भाजपा से खुद को अलग दिखाने की कोशिश की है।
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सीएम हरीश रावत पार्टी का घोषित चुनावी चेहरा हैं। उन्हें दो सीटों हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा से उम्मीदवार बनाया गया है ताकि पार्टी हरिद्वार और यूएस नगर में दूसरी सीटों पर उनके प्रभामंडल का फायदा ले सकें।  सियासी जानकार इसे गढ़वाल और कुमाऊं में संतुलन बिठाने  की कवायद के तौर पर भी देख रहे हैं।

साथ ही दूरदर्शी इसे अपने मनपसंद के एक और व्यक्ति को भविष्य में विधानसभा में पहुंचाने  की रावत की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। रावत के दो सीटों पर लड़ने को लेकर उनके कुछ विरोधी जरूर उन्हें डरा हुआ करार दे रहे हैं, मगर रावत को जानने वाले कहते हैं कि जब रावत को उनके करीबी ही नहीं समझ पाए तो विरोधी क्या समझेंगे ? खैर, यह तो 11 मार्च को ही पता चलेगा कि किसका प्लान हिट रहा और किसका फ्लाप?
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rahul gandhi shows torn kurta - फोटो : file photo
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, राहुल गांधी के सभा के मंच से चुनाव न लड़ने का एलान कर चुके थे, लेकिन उन्हें सहसपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। सूची में किशोर का नाम सहसपुर से आते ही कुछ लोगों की प्रतिक्रिया आई कि रावत ने किशोर को इस सीट से उतारकर अपने रास्ते का एक और पत्थर हटा दिया।

क्या वाकई ऐसा है, पड़ताल में तात्कालिक प्रतिक्रिया को खारिज करने कोई कारण तो नहीं मिला, उल्टे उत्तराखंड के राजनीतिक पंडितों ने इसे रावत के दोनों हाथों में लड्डू जैसा खेल बता दिया। दरअसल यह सीटमुस्लिम प्रभाव वाली है, अगर इसके सभी समीकरणों को किशोर साध कर पार निकल गए तो रावत की दूरदर्शिता के चर्चे होंगे और अगर बगावत व अन्य कारणों से किशोर निपट गए तो ये उनकी कमजोरी मानी जाएगी।

रास्ते के पत्थरवाली बात फिर अपने-आप साबित हो जाएगी। रावत और किशोर से इतर सूची पर नजर डालने पर पार्टी ने भाजपा के खांटी और पुराने चेहरों की टक्कर में नए चेहरों पर दांव लगाया है। साथ ही उसके उन विद्रोहियों को मैदान में उतारा है जो पिछले पांच साल से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।

हालांकि बाहरी चेहरों को उम्मीदवार बनाने में वह खुद को भाजपा से अलग नहीं दिखा पाई है, लेकिन उसने विपक्ष के बड़े चेहरों के बजाए ऐसे चेहरों पर दांव पर लगाया है जिन्हें वह आगे चलकर सहजता से मैनेज कर सकती है। बानगी के तौर पर पूर्व विधायक शैलेन्द्र सिंह रावत को पार्टी यमकेश्वर से प्रत्याशी बनाने में कामयाब रही, जबकि वह कोटद्वार से टिकट मांग रहे थे।

सियासी संकट में कांग्रेस के साथ खड़े रहे भाजपा के विद्रोही दान सिंह भंडारी और भीमलाल आर्य, निर्दलीय विधायक मंत्री प्रसाद नैथानी और हरीश चंद्र दुर्गापाल को टिकट देकर पार्टी ने संदेश देने की कोशिश की है कि वह बुरे वक्त के साथियों का ख्याल रखती है। उसने सिर्फ एक सिटिंग विधायक सुंदरलाल मंद्रवाल का टिकट काटा है। मंद्रवाल की बुजुर्गियत पर उठ रहे सवाल का जवाब पार्टी ने एकदम नए चेहरे नवल किशोर को उतारकर दिया है।

साथ ही यमुनोत्री से संजय डोभाल, केदारनाथ से मनोज रावत,  नरेन्द्र नगर से हिमांशु बिजलवाण, ज्वालापुर से शीशपाल सिंह, पौड़ी से नवल किशोर, डीडीहाट से प्रदीप सिंह पाल, सल्ट से गंगा पंचोली, लोहाघाट से कुशाल सिंह अधिकारी, बाजपुर से सुनीता बाजवा और खटीमा से भुवन चंद कापड़ी एकदम नए चेहरे हैं। 
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रिवर्स पलायन का दावा, खुद मैदान में

हरक सिंह रावत - फोटो : ANI
सीएम ने दो सीटों से चुनाव लड़कर गढ़वाल और कुमाऊं के बीच संतुलन दिखाने की कोशिश तो की है, मगर ये दोनों ही सीटें मैदानी हैं। सवाल उठाए जा रहे हैं कि रिवर्स पलायन का दावा करने वाले सीएम खुद पहाड़ के बजाय मैदान में पलायन कर गए। बता दें कि सीएम के केदारनाथ से चुनाव लड़ने की चर्चाएं थीं।

हजम नहीं हो रहा लक्ष्मी का टिकट 
कांग्रेस की सूची में लक्ष्मी राणा का नाम सबसे चौंकाने वाला है। पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह की करीबी लक्ष्मी को पार्टी ने निष्कासित कर दिया था। उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने से क्षेत्र में खासा उबाल है। 

दून से हरिद्वार तक पंजाबी उम्मीदवार नहीं
कांग्रेस की सूची में दून से हरिद्वार तक पंजाबी समुदाय से उम्मीदवार न बनाए जाने को भाजपा मुद्दा बना सकती है। पिछले विस चुनाव में कांग्रेस ने देहरादून कैंट और रायपुर से पंजाबी समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया था।
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