उधर, इस दल के साथ लापता हुए इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन के जनसंपर्क अधिकारी चेतन पांडेय भी थे। उनके संबंध में कोई जानकारी नहीं मिलने से चेतन पांडेय के परिजन परेशान हैं।
इस घटना के बाद से पिथौरागढ़ में प्रतीक्षा कर रहे चेतन पांडेय के भाई हिमांशु पांडेय ने बताया कि वह अपने भाई की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। प्रशासन की ओर से कुछ शव बर्फ में पड़े होने की सूचना दी गई। आईएमएफ की ओर से रेस्क्यू अभियान चलाने को लेकर चार एक्सपर्ट सदस्य यहां पर भेजे गए थे।
वहीं, नंदा देवी बेस कैम्प से रेस्क्यू कर लाए गए चार ब्रिटिश पर्वतारोही अपने देश जाने के लिए दिल्ली को रवाना हो गए। इस अवसर पर टीम के उपनेता मार्क ने कहा कि शीघ्र ही पर्वतारोहियों का एक बड़ा दल लेकर आएंगे और मार्टिन की याद में नंदा देवी फतह करेंगे। साथियों को खोने के बाद अपने देश को रवाना होते समय चारों पर्वतारोहियों की आंखें नम थीं।
बेस कैंप में फंसे फिलिप मार्क थॉमस, लेन बेड, जेचरी जोसेफ क्वीन और महिला पर्वतारोही कैथरीन जेन आर्मस्ट्रांग को दो जून को हेली से रेस्क्यू कर पिथौरागढ़ पहुंचाया था। इनका सामान बेस कैंप से पोर्टरों ने मुनस्यारी पहुंचाया।
तीन दिन पिथौरागढ़ में रहने के बाद चारों पर्वतारोही मुनस्यारी पहुंचे। यहां से बृहस्पतिवार को वे अपने देश के लिए रवाना हुए। इस दौरान चारों पर्वतारोही बेहद भावुक नजर आए। मार्क ने कहा कि वर्ष 2020-21 तक बड़े दल के साथ यहां आकर नंदा देवी चोटी में फिर से पर्वतारोहण किया जाएगा।