संस्थान बनेगा तो बचाव की रणनीति भी बनेगा
रिपोर्ट में उत्तराखंड में राज्य आपदा प्रबंधन संस्थान खोलने की सिफारिश की गई। कहा गया कि उत्तराखंड में इस संस्थान की जरूरत इसलिए है क्योंकि यह राज्य बाढ़, भूस्खलन, भूकंप, हिमस्खलन व अन्य प्राकृतिक आपदाओं को लेकर बेहद संवेदनशील है। इन घटनाओं में जोखिम और नुकसान को कम करने के लिए संस्थान संभावित आपदाओं व उनके जोखिम की तकनीकी व वैज्ञानिक तरीके से पहचान कर सकता है। ऐसे अध्ययन के आधार पर बचाव की रणनीति बनाई जा सकती है।
उपग्रहों से निगेहबानी बढ़ाई जाए
विशेषज्ञों ने रैंणी आपदा की वजह ग्लेशियरों के टूटने की मानी गई। अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया कि नदियों के उद्गम स्थलों व ग्लेशियर क्षेत्रों में उपग्रहों (सेटेलाइट) से निगरानी को बढ़ाया जाए। इसके लिए इसरो देश से बाहर दूसरी एजेंसियों का भी सहयोग ले सकता है। साथ ही ऊंचाई वाले स्थानों पर हाइड्रो मेट्रोलॉजिकल स्टेशन भी बनाए जाएं।
ग्लेशियरों के अध्ययन के लिए संस्थान बने
रिपोर्ट में ग्लेशियरों के अध्ययन के लिए सेंटर फॉर ग्लेशियल रिसर्च स्टडीज एंड मैनेजमेंट की स्थापना की जरूरत बताई गई। साथ ही कहा गया कि ग्लेशियोलॉजी व ग्लेशियर अध्ययन करने वाले अकादमिक व शोध संस्थान अलग-अलग होकर काम करने के बजाय एक दूसरे को आंकड़ों और अध्ययन को साझा करें और इसके दोहराव से बचें।