शिक्षिका ने सैनिक स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों को किया था प्रेरित
कुशाग्र की कुशाग्र बुद्धि को देखते हुए उनकी शिक्षिका ने अभिभावकों को सैनिक स्कूल का फॉर्म भरवाने की बात कही थी। कुशाग्र की मां ललिता दुर्गापाल ने बताया कि जब कुशाग्र कक्षा पांचवी में था तब उनकी शिक्षिका रेनू भोज ने कुशाग्र को सैनिक स्कूल के लिए तैयारी करने की प्रेरणा दी। जिसके बाद से ही उन्होंने यह लक्ष्य तय कर लिया था और कक्षा आठवीं से सैनिक स्कूल के लिए कोचिंग कराई।
डॉक्यूमेंट्री देख जागी नेवी में जाने की इच्छा
कुशाग्र ने बताया कि उन्होंने कक्षा सातवीं में इंडियन नेवल एकेडमी की एक डॉक्युमेंट्री देखी थी। जिसे देखने के बाद उनमें नेवी जॉइन करने की इच्छा जागी। फिर जानकारी लेने पर पता चला कि इंडियन नेवी के लिए सैनिक स्कूल से सिलेक्शन रेट अच्छा है। इसके बाद आठवीं कक्षा से सैनिक स्कूल के लिए तैयारी की। एनडीए में कुशाग्र ने नेवी जॉइन करने का चयन किया है।
छोटे लक्ष्य बनाकर बड़े लक्ष्य की करें तैयारी
कुशाग्र ने युवाओं को संदेश दिया है कि अगर जीवन में कोई लक्ष्य हो तो उस पर मेहनत कर सपने लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए छोटे लक्ष्य बनाएं। वार्षिक लक्ष्य बनाकर उनको हासिल करें तो बड़े लक्ष्य में भी सफलता जरूर मिलेगी।