उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने भी सरकारी आवास की सुविधा छोड़ दी है। उनके सचिव ने इस बारे में बृहस्पतिवार को राज्य संपत्ति विभाग को अवगत कर दिया है। इससे पहले तिवारी की ओर से आवास खाली करने के लिए हाईकोर्ट से 31 मार्च तक का वक्त मांगा गया था, लेकिन बृहस्पतिवार को उन्होंने अपने इस अनुरोध को वापस ले लिया।
एनडी तिवारी को पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर 2007 में एफआरआई कैंपस में सरकारी आवास की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी आवास की सुविधा वापस लेने को लेकर रूलक संस्था की ओर से 2010 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को 15 फरवरी तक सरकारी आवास की सुविधा छोड़ने का आदेश दिया था।
कोर्ट के आदेश के बाद चार पूर्व मुख्यमंत्रियों भगत सिंह कोश्यारी, बीसी खंडूड़ी, रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा ने सरकारी आवास की सुविधा निर्धारित समय सीमा से पहले छोड़ दी थी। इधर, तिवारी के सचिव संजय जोशी ने बृहस्पतिवार को राज्य संपत्ति अधिकारी (आरएसए) विनय शंकर पांडेय को इस बात की जानकारी दी गई है कि कोर्ट के आदेश के बाद एनडी तिवारी ने भी आवास खाली कर दिया है।
तिवारी के आवास पर यूपीसीएल ठोक चुकी है दावा
एनडी तिवारी एफआरआई कैंपस स्थित जिस आवास पर काबिज थे, उस पर यूपीसीएल ने अपना दावा ठोक रखा है। यूपीसीएल का कहना है कि यह आवास उसका है, जिसे एफआरआई ने लीज पर दिया था। यूपीसीएल को भी इस आवास को एफआरआई को वापस करना है। तिवारी द्वारा आवास खाली करने की जानकारी मिलने के बाद यूपीसीएल के अधिकारियों ने इस बारे में राज्य संपत्ति विभाग से संपर्क साधकर कहा है कि आवास उसे सौंप दिया जाए।