एनएच मुआवजा घोटाले की जिला प्रशासन स्तर की पड़ताल में एक नायब तहसीलदार के स्तर से ही मुआवजे की फाइलें बैकडेट में पास करने का मामला सामने आया है। इस नायब तहसीलदार ने 11 बड़ी फाइलों में अपने आला अफसरों के साथ मिलकर हेरफेर की है। वह अब नैनीताल जिले में कार्यरत है।
सूत्रों के मुताबिक आरोपित नायब तहसीलदार का मूल पद रजिस्ट्रार कानूनगो है। जिला प्रशासन की अंदरूनी जांच में यह मामला अब सामने आने लगा है। यह नायब तहसीलदार सितारगंज, गदरपुर तहसील में भी रह चुका है। इसके बाद वर्ष 2015-16 में नायब तहसीलदार को विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय ऊधमसिंह नगर में तैनात किया गया।
इस नायब तहसीलदार को सितारगंज, गदरपुर तहसील क्षेत्रों की पूरी जानकारी थी, इसलिए करोड़ों रुपये के मुआवजे की 11 फाइलों को बैकडेट में पास करके मोटी रकम ली गई। इनमें सात फाइलें सितारगंज, चार फाइलें गदरपुर तहसील क्षेत्र की थीं। डीएम नीरज खैरवाल का कहना है कि इस तरह के नए मामले भी सामने निकल कर आ रहे हैं।
दूसरी ओर, एनएच-74 के भूमि मुआवजा घोटाले में एक पीसीएस अधिकारी पर आकाओं की मेहरबानी भी बरकरार बताई जा रही है। इस अधिकारी के एसडीएम कार्यकाल में गदरपुर, बाजपुर क्षेत्र में सबसे ज्यादा घोटाले के मामले सामने आए हैं।
एक मंत्री के करीबी होने के कारण उस पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। सूत्रों का कहना है कि जिला प्रशासन की आंतरिक जांच में अगर मामला स्पष्ट पाया गया तो उस पीसीएस अधिकारी का नपना तय है।