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'शक्ति' को सलाम: जब परिवार ने नौकरी से रोका तो समाज को आगे बढ़ाया...प्रेरणा देगी देहरादून की रेणु की कहानी

Thu, 03 Apr 2025 05:11 PM IST
अलका त्यागी दीपा शर्मा, अमर उजाला, देहरादून

सार

Navratri 2025: नवरात्र में हम आपको ऐसी महिला के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने सफलता हासिल करने के लिए समाज की रूढ़ियों को चुनौती दी और अपने सपनों को पूरा किया। 
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रेणु रौतेला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अच्छी परवरिश के साथ बेहतर शिक्षा मिली, लेकिन समाज की रूढ़िवादी सोच के कारण नौकरी करने की अनुमति नहीं मिली। जीवन में कुछ करने का जुनून था, जिससे महिलाओं के उत्थान का प्रयास किया और यही दून निवासी रेणु की पहचान बन गया। उन्होंने शुरुआत में एक एनजीओ खोला और इसके जरिये उन महिलाओं का जीवन सुधारा जो आर्थिक रूप से कमजोर थीं और स्लम एरिया में रहती थीं। आज यह मातृशक्ति पांच एनजीओ खोल चुकी हैं और दो और की तैयारी है। वह इसके जरिये करीब 1000 महिलाओं को बेहतर जीवन के साथ ही रोजगार भी दिला रही हैं।

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देहरादून के विद्या विहार निवासी रेणु रौतेला आज एक सफल समाजसेविका हैं, लेकिन यह सफलता हासिल करने के लिए उन्होंने समाज की रूढ़ियों को चुनौती दी और अपने सपनों को पूरा किया। रेणु बताती हैं कि वह पांच भाइयों की अकेली बहन हैं, उन्होंने पीजी तक पढ़ाई की। 22 की उम्र में 1990 में शिशु मंदिर में, बनारस समेत चार जगहों पर नौकरी के लिए चयन हो गया था, लेकिन अकेली लड़की कैसे बाहर रहेगी परिवार की इस रूढ़िवादी सोच ने नौकरी नहीं करने दी। जनवरी 1991 में शादी हुई और कुछ समय बाद जुड़वा बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। मगर मन में अपनी पहचान बनाने का जज्बा नहीं गया।

पति वीरेंद्र सिंह रौतेला सेंट जोजफ स्कूल में थे तो उन्होंने पूरा सहयोग किया। शुरुआत में टिफिन सर्विस शुरू की, इससे घर खर्च तो निकलने लगा, पर मन शांत नहीं हुआ। इसके बाद महिलाओं के उत्थान की ठानी और विद्या विहार की और अन्य जगहों से 50 से अधिक महिलाओं को एक साथ जोड़ा और पहला महिला उत्थान सशक्तीकरण ट्रस्ट (एनजीओ) वर्ष 9 सितंबर 2021 में खोल दिया। 23 सितंबर को इसे रजिस्टर करवा लिया। तब से लेकर अब तक उनकी ट्रस्ट की पांच शाखाएं खोल दीं। हरिद्वार और दूधली में खोलने की तैयारी है।
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यहां-यहां हैं शाखाएं

रेणु रौतेला देहरादून शाखा ट्रस्ट की अध्यक्ष हैं जबकि रजनी तड़ियाल कोषाध्यक्ष हैं। उनके और उनके साथियों मीरा, सुषमा बिजल्वाण, अनुराधा, कुसुम नौटियाल, शिवानी वर्मा, सुषमा बोस समेत कई के प्रयास से आज ट्रस्ट की शाखाएं कुसुम विहार सिंगल मंडी वार्ड नंबर 73, बंजारावाला, कारगी चौक के पास, नई बस्ती चुक्खूवाला में, ऋषिकेश लक्ष्मण झूला में खोल चुकी हैं। करीब 4000 से अधिक महिलाएं इस ट्रस्ट से जुड़ी हैं और अन्य के जीवन को बेहतर करने में जुटी हैं। रेणु बताती हैं कभी भी किसी को जरूरत पड़ने या महिला उत्पीड़न की सूचना पर ट्रस्ट के सदस्य तुरंत मदद के लिए पहुंच जाते हैं।

1000 से अधिक महिलाओं को रोजगार के साथ दे रहे प्रशिक्षण भी

ट्रस्ट से जुड़ी आरती राणा, कपिला सकलानी बताती हैं कि इस ट्रस्ट के जरिये आर्थिक रूप से कमजोर और स्लम क्षेत्र की महिलाओं से मिलना शुरू किया। शुरुआत में संसाधनों की कमी थी, मगर मेहनत रंग लाई धीरे-धीरे करीब 1000 से अधिक महिलाओं को जोड़ा और उनके उत्थान में जुट गए। इन महिलाओं को पहाड़ी नमक, अचार, चायपत्ती मसाला, धूपबत्ती, मल्टीग्रेन आटा तैयार करने का प्रशिक्षण दिया। इससे उन महिलाओं के जीवन में सुधार आया और आज उन्हें 12 महीने काम के साथ हर माह वेतन भी मिलता है। उनकी ओर से बनाई गई धूपबत्ती को टूरिस्ट भी खूब पसंद कर रहे हैं। उनका यह ट्रस्ट महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न तरह के प्रशिक्षण भी देता है।
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