संकट काल में साथ खड़े विधायकों में से आधा दर्जन से अधिक प्रबल दावेदारों के बीच दो को कैबिनेट मंत्री का ताज पहनाने से कई विधायक सीएम हरीश रावत से नाराज हो सकते हैं। मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से दूसरे दावेदार विधायकों हीरा सिंह बिष्ट, अनसूया प्रसाद, जीतराम, गणेश गोदियाल, ममता राकेश आदि की नाराजगी कोई न कोई गुल जरूर लाएगी।
राजनीति के जानकारों का कहना है कि मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व न पाने वाले जनपदों में पनपने वाला अंसतोष अगर चुनाव में भाजपा और बसपा को भी फायदा दे जाए तो अचरज नहीं। वैसे तो सीएम हरीश रावत ने सियासी समीकरणों के लिहाज से सही चाल चली है। दरअसल, कुमाऊं के हिस्से राज्यसभा सांसद आने के बाद अब दो मंत्रियों को गढ़वाल से बनाकर सियासी संतुलन बैठाने का दांव हरीश रावत चल रहे हैँ।
नौ बागी विधायकों के बाहर होने से कांग्रेस के सामने चेहरों की कमी हो गई है। मंत्रिमंडल में दी जा रही सियासी समीकरणों का गुणा भाग जरा सा भी गलत बैठा तो दांव उलटा भी पड़ सकता है। नवप्रभात के मंत्री बनने से उपचुनाव जीतकर आए डोईवाला विधायक हीरा सिंह बिष्ट नाराज हो सकते हैं।