प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए अच्छी खबर है। इन स्कूलों के बच्चे अब राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों में आसानी से दाखिला पा सकेंगे।
उत्तराखंड सरकार अब राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों में इन बच्चों के लिए 60 प्रतिशत कोटा तय करने जा रही है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने विभागीय अधिकारियों को इसके निर्देश जारी कर दिए हैं। कोटे वाली सीटों पर एडमिशन लॉटरी या पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा, यह अभी तय होना है।
प्रदेश के सभी 13 जनपदों में राजीव गांधी नवोदय विद्यालय हैं। इनमें कुल 4410 सीटें हैं। यहां बच्चों को छठी से इंटरमीडिएट तक निशुल्क शिक्षा दी जाती है। ड्रेस से लेकर उनके रहने-खाने तक की पूरी व्यवस्था सरकार करती है। ग्रामीण मेधावी छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए इन आवासीय विद्यालयों की स्थापना की गई थी।
प्रतिभा केंद्र के रूप में स्थापित इन विद्यालयों में प्रवेश परीक्षा के आधार पर एडमिशन होते हैं। लेकिन शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के मुताबिक इन स्कूलों की स्थापना के पीछे जो मंशा थी वह पूरी नहीं हो पा रही है।
कई बार लोग जुगाड़बाजी से बच्चों को मेरिट में दर्शाकर दाखिला करा लेते हैं। स्कूलों के जरिये जिन बच्चों को लाभ मिलना चाहिए था, उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिक्षा मंत्री के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में गरीब तबके के लोगों के बच्चे पढ़ रहे हैं।
ये बच्चे प्राथमिक विद्यालयों से निकलने के बाद आर्थिक कारणों के चलते हाईस्कूल और इंटरमीडिएट नहीं कर पाते। अब सरकार की मंशा है कि सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को नवोदय विद्यालयों में एडमिशन दिया जाए। सरकार इन स्कूलों के बच्चों के लिए कोटा तय करने जा रही है।
यह है सरकार की मंशा
अभी प्रदेश में 13 नवोदय विद्यालय हैं। इसके अलावा प्रदेश सरकार हर ब्लॉक में एक आवासीय विद्यालय खोलने जा रही हैं। इसमें कक्षा एक पांच तक के बच्चों के लिए डे बोर्डिंग और आनेजाने की सुविधा एवं छह से आठ तक के बच्चों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना प्रस्तावित है। हालांकि, 95 ब्लॉकों में खुलने वाले इन विद्यालयों का नाम अभी तय नहीं हो पाया है। इन स्कूलों में भी बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाएगी।
राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों में 60 फीसदी सीटों पर सरकारी प्राथमिक विद्यालयों से पढ़कर निकलने वाले बच्चों को एडमिशन दिया जाएगा। अन्य सीटों पर विभाग प्रवेश परीक्षा के आधार पर एडमिशन दे सकता है। विभागीय अधिकारियों को इसके लिए निर्देश दिए गए हैं।
- अरविंद पांडे, शिक्षा मंत्री