पूरी दुनिया घूमने का है सपना : समरीन
इस कैफे में कार्यरत देहरादून की 23 वर्षीय समरीन का पूरी दुनिया घूमकर अलग-अलग देशों में काम करने का सपना है। वह बताती हैं कि उन्होंने बजाज इंस्टीट्यूट से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई के ताज होटल में अपनी इंटर्नशिप पूरी की। इसके बाद देहरादून के दो निजी रेस्टोरेंट में काम किया लेकिन संवाद में दिक्कत आने के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ी।
बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः इस कैफे से जुड़ीं। वह पिछले तीन महीनों से यहां काम कर रहीं हैं। समरीन बताती हैं कि यहां काम करना उन्हें बेहद पसंद है और जब लोग उन्हें देखकर संवाद करने की कोशिश करते हैं तो उन्हें अच्छा लगता है। वह कहती हैं जीवन बेहद खूबसूरत है और इसे खुलकर जिएं।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand: सामने आई एक आराम तलब बाघिन की कहानी...भारतीय वन्यजीव संस्थान ने 10 माह तक किया अध्ययन
हर रोज मिलती है प्रेरणा : गौरीशंकर
के असिस्टेंट मैनेजर टिहरी गढ़वाल के रहने वाले गौरीशंकर बताते हैं कि वह बीते महीने से यहां काम कर रहे हैं। वह इससे पहले कई जगह काम कर चुके हैं लेकिन उन्हें इस कैफे की थीम रोचक लगती है। वह बताते है हर रोज कैफे में कदम रखते ही उन्हें बेहद प्रेरणा मिलती है और अपने संघर्ष छोटे लगने लगते हैं।
एक बहन समझती है इशारे तो दूसरी समझाती है। बहन आयुषी से साइन लैंग्वेज में बात करतीं तनिष्का
- फोटो : अमर उजाला
एक बहन समझती है इशारे, दूसरी समझाती है
कैफे में काम करने वाली आयुषी और तनिष्का सगी बहनें हैं। दोनों मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली हैं। 23 वर्षीय आयुषी मूक-बधिर हैं, वहीं 21 वर्षीय तनिष्का, आयुषी और यहां काम कर रहे अन्य स्टाफ के बीच संवाद की कड़ी हैं। कंप्यूटर में गहरी रुचि रखने वाली आयुषी ने सात वर्ष की उम्र से बजाज इंस्टीट्यूट में शिक्षा ली। इसके बाद उन्हें चंडीगढ़ की एक निजी कंपनी में नौकरी मिली, लेकिन परिस्थितियों के चलते वह देहरादून आई और 'द साइलेंट बिस्ट्रो' से जुड़कर अपने सपनों को दोबारा दिशा दी। आयुषी कहती हैं कि चुनौतियां आती हैं, लेकिन वह अपने जैसे अन्य युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं।
यदि वह मूक-बधिर न होतीं तो आज एक शिक्षक होतीं, उन्होंने हार नहीं मानी है और उनका सपना देश-विदेश में बच्चों को पढ़ाने का है। आयुषी की खामोशी को शब्द देती हैं उनकी बहन तनिष्का, जो बचपन से इशारों की भाषा समझती आई हैं। आयुषी ने ही उन्हें साइन लैंग्वेज की गहराई से परिचित कराया और आज तनिष्का इसमें दक्ष होकर कैफे में ग्राहकों और स्टाफ के बीच संवाद को सहज बना रही हैं। तनिष्का कहती हैं कि इन युवाओं के साथ काम करना उनके लिए एक अलग और खूबसूरत अनुभव है।