जानकारों के अनुसार स्वामी विवेकानंद पहली बार वर्ष 1890 में देहरादून आए थे। वह अपनी यात्रा के तहत कुमाऊं के अलग-अलग स्थानों से होते हुए श्रीनगर गढ़वाल भी पहुंचे। यहां से टिहरी के रास्ते वह देहरादून पहुंचे थे। उन्होंने राजपुर स्थित बावड़ी शिव मंदिर में कई दिन तक प्रवास किया। अपने गुरु भाई स्वामी तुरियानंद के साथ उन्होंने कई दिन तक तपस्या की।
बाद में स्वामी करूणानंद ने यहां आश्रम स्थापित किया। उनके समय में ही रामकृष्ण मिशन धर्मार्थ औषधालय भी शुरू किया गया। जिसका आज भी लोगों को लाभ मिल रहा है। दूसरी बार वह वर्ष 1897 में उत्तराखंड आए। तब उन्होंने ज्यादातर समय प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में गुजारा। वह कुछ समय के लिए ही देहरादून आए थे।