इसी जगह उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। अपनी अनुभूति उन्होंने साथ चल रहे अखंडानंद को बताई। उसके बाद दोनों पैदल अल्मोड़ा को चल पड़े अल्मोड़ा से कुछ दूर पहले करबला कब्रिस्तान के निकट स्वामी जी भूख और थकान के कारण अचेत हो गए।
पास में रहने वाले एक फकीर ने खीरा (पहाड़ी ककड़ी) खिलायी जिससे स्वामी विवेकानंद चेतना में लौटे। बताते हैं कि अमेरिका के धर्म सम्मेलन से लौटने के बाद स्वामी विवेकानंद जब दूसरी बार अल्मोड़ा पहुंचे तो उनका अभूतपूर्व स्वागत हुआ।
इस दौरान स्वामी जी उस फकीर को भी पहचान गए, जिसने उनकी जान बचाई थी। स्वामी जी उसके पास गए और उसे दो रुपये भी दिए। अल्मोड़ा में स्वामी विवेकानंद दो बार खजांची मोहल्ला में लाला बद्री साह के मेहमान बनकर कुछ दिन रुके।
इस घर को देखने आज भी काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इसके अलावा वह छावनी इलाके में स्व. अंबा दत्त के बगीचे में भी गए। प्रदेश सरकार से जुड़े प्रतिनिधि कई बार स्वामी विवेकानंद से जुड़े इन स्थलों को पर्यटन सर्किट के तौर पर विकसित करने की घोषणा कर चुके हैं लेकिन आज तक इसके लिए प्रस्ताव तक तैयार नहीं किया जा सका है।
बता दें कि हर साल कोलकाता और अन्य राज्यों से स्वामी विवेकानंद के हजारों की संख्या में अनुयायी और अन्य भक्त इन स्थलों को देखने अल्मोड़ा पहुंचते हैं। यदि इन स्थलों को विकसित करके पर्यटन सर्किट का रूप दिया जाए तो पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा हो सकता है।
पर्यटन विभाग फिलहाल स्वामी विवेकानंद के अल्मोड़ा से संबंधित साहित्य को संग्रहित करने की योजना बना रहा है। पर्यटन सर्किट बनाने का कोई प्रस्ताव न तो तैयार किया गया है और न ही ऐसी कोई योजना है।
राहुल चौबे जिला पर्यटन अधिकारी अल्मोड़ा