आयोजन स्थल भल्ला स्टेडियम ठहरने वाले स्कूलों से पांच-पांच किमी की दूरी पर होने से कई जनपदों के बच्चों को पैदल ही आना पड़ा। शुभारंभ सत्र दोपहर डेढ़ बजे समाप्त हुआ तो बच्चों को ठहरने वाले स्थान पर भी भोजन के लिए कहा गया। इससे बच्चे बड़े निराश नजर आए। बच्चों को ठहरने के स्थानों पर पहुंचकर दोपहर बाद करीब तीन बजे भोजन मिल सका।
महिला खिलाड़ी और सिक्योरिटी जीरो
खिलाड़ियों में आधी संख्या महिला खिलाड़ियों की रही। बावजूद इसके उनके ठहरने से लेकर आयोजन स्थल पर सिक्योरिटी का कोई इंतजाम नहीं किया गया। जिन स्कूलों में लड़के एवं लड़कियां ठहरी हुई वहां पर केवल स्कूल का सिक्योरिटी गार्ड ही था।
यही हाल भल्ला स्टेडियम में भी देखने को मिला। यहां सिक्योरिटी न होने के चलते आवारा लड़के मैदान के अंदर घूमते हुए मिले। ऐसे में यदि किसी छात्र या छात्रा के साथ कोई अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल खड़ा होता है।
विभाग से मात्र 2.50 लाख रुपये का बजट मिलता है। इससे आयोजन में आने वाले बच्चों के लिए समुचित इंतजाम करने में परेशानी रहती है। ऐसे में कुछ इंतजाम स्कूलों की ओर से ही करने को कहा गया। जिन स्कूलों में लाइट की व्यवस्था नहीं थी उनमें बुधवार को कराई गई है। बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित जनपदों के क्रीड़ा संयोजक के द्वारा स्टाफ से तालमेल करने को निर्देश दिए गए थे। मामले की जांच कराई जाएंगी।
- डॉ. आनंद भारद्वाज, जिला शिक्षा अधिकारी