आज तड़के से ही मंदिर में बाबा मद्महेश्वर की पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी। मुख्य पुजारी द्वारा आराध्य का श्रृंगार कर भोग लगाया गया। सभी धार्मिक औपचारिकताओं को पूरा करते हुए गर्भगृह में स्थापित स्वयंभू लिंग को समाधि रूप देकर विशेष पूजा एवं आरती की गई।
इसके बाद द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्तियों को चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान किया गया। धाम से विदा होने से पूर्व आराध्य द्वारा अपने पात्रों का निरीक्षण करते हुए मंदिर की तीन परिक्रमा की गईं।
इसके बाद हक-हकूकधारियों की मौजूदगी में विधि-विधान व बाबा के आह्वान के साथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। आराध्य के आगमन पर 23 नवंबर से ऊखीमठ में तीन दिवसीय मद्महेश्वर मेला भी शुरू हो रहा है, जिसकी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।