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उत्तराखंड की सीमाएं बनीं तो 'खिसक' गई बनी

Thu, 20 Feb 2014 12:20 PM IST
अमर उजाला, रुड़की
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बीते दिनों केंद्रीय संस्कृति मंत्री चंद्र कुमारी कटोच ने कैग के जिस रिपोर्ट का खंडन करते हुए रुड़की में खेड़ा की (बांदी) बनी के होने का जिक्र किया था वह दरअसल सहारनपुर के बेहट में मौजूद है।
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दरअसल, आगरा सर्किल से जब दून सर्किल की सीमाएं जुदा हुईं तो यह स्थान सहारनपुर की बेहट तहसील के हिस्से आया, लेकिन कागजों में इसका संरक्षण अभी तक हरिद्वार जिले में किया जा रहा है। इसे ठीक करने के लिए दून सर्किल की तरफ से प्रस्ताव भेजा जा चुका है।

यह मुद्दा एक बार फिर तब उभर गया, जब कैग ने देश के 92 स्मारकों के जमींदोज या लुप्त होने का दावा किया। संस्कृति मंत्रालय ने इस दावे को गलत करार देते हुए इनमें से 42 को मौजूद बताया है। खेड़ा की बनी इन्हीं में एक है।
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पुराने कब्रिस्तान से जुड़ गई थी खेड़ा की बांदी
सरकारी दस्तावेजों में नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए ‘खेड़ा की बांदी (बनी)’ से ओल्ड सिमेट्री (पुराना कब्रिस्तान) जोड़ा गया था। रुड़की में 1860 से ही पुराना कब्रिस्तान मौजूद है। जिसका राष्ट्रीय स्मारक के रूप में 1920 में नोटिफिकेशन हुआ।

यही वजह है कि खेड़ा की बांदी से पहले पुराना कब्रिस्तान जोड़े जाने के चलते यह भ्रम हुआ है कि इसी कब्रिस्तान में खेड़ा की बांदी नाम से कोई ग्रेव्स (कब्र) मौजूद हो।

स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है कब्रगाहें

रुड़की में बंगाल सैपर्स, थॉमसन इंजीनियरिंग कालेज और गंगनहर का निर्माण। इन सबने रुड़की को देश ही नहीं दुनिया के अक्स में बेहतरीन इंजीनियरिंग दक्षता के रूप में स्थापित किया।

अतीत के इस गौरवशाली प्रतिष्ठानों को स्थापित करने वाले अंग्रेजी हुकूमत के महान इंजीनियर और वास्तुविद अपने हुनर का प्रदर्शन करने के बाद दुनिया से रुख्सत हुए। इनमें से अधिकांश की कब्रगाहें रुड़की स्थित पुराने कब्रिस्तान में आज भी उनके नाम की गवाही दे रही है।

बेहतरीन नक्काशी, कलाकारी और डिजाइनिंग के लिए जाने जानी वाली इन कब्रगाहों पर खोदे गए गॉड का समर्पित स्लोगन हर किसी को आकर्षित करते हैं। इसी के चलते यह कब्रिस्तान देश के राष्ट्रीय स्मारकों में शुमार है।

ऐतिहासिक शेर में मौजूद है जेल

समृद्धि और शान के प्रतीक रुड़की के चार ऐतिहासिक शेरों में से एक शेरकोठी स्थित शेर के भीतर आज भी वह जेल मौजूद है। जहां ब्रिटिश काल में जज दोषियों को इसके भीतर डाल देते थे।

सेंटजोंस चर्च के फादर दयाल एमलाल ने बताया कि यह शेर 1847 में गंगनहर के निर्माण के दौरान बनाया गया था।

चार शेर गंगनहर के दोनों ओर स्थापित किए गए हैं। जबकि नमूने के तौर पर बनाया गया पहला शेर यहां शेरकोठी में स्थित है। उन्होंने बताया कि शेर के भीतर एक जेल भी बनी है। फादर जेबी फ्रैंड अग्रवाल बतौर जज सजा सुनाने के बाद इसी जेल में कैदियों को रखते थे।
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जब ग्रैंड फादर की कब्र पर रो पड़ी सैडविक

एक सप्ताह पूर्व इंग्लैंड की शीला सैडविक आईआईटी रुड़की पहुंची थीं। संस्थान निदेशक प्रो. प्रदीप्त बनर्जी से सैडविक ने अपने ग्रैंड फादर फ्रैडरिक विलियम्स सैडविक के बारे में पूछा।

फैडरिक विलियम्स रुड़की थॉमसन इंजीनियरिंग कालेज में इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट के प्रोफेसर थे। 1920 में उनकी मृत्यु हुई। जिनकी कब्रगाह आज भी पुराने कब्रिस्तान में स्थित है।

शीला सैडविक ने वहां पहुंचकर ग्रैंड फादर की कब्र को देखा तो खुद को रोक नहीं पाई और रो पड़ी। उन्होंने संस्थान को इसके लिए धन्यवाद भी दिया।

शीला सैडविक इन दिनों हिमाचल के धर्मशाला में रहती हैं और वहां उनका ‘इगल्स नेस्ट’ के नाम से होटल भी है।
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