झारखंड निवासी 26 वर्षीय अंबरी प्रवीण ने बताया कि वह चार भाई-बहन हैं, जिनमें से तीन ब्लाइंड (दृष्टिबाधित) हैं। बड़ी बेटी होने के कारण पिता जी को उनकी काफी चिंता रहती थी। साल 2006 में जब वह 10वीं कक्षा में थी तो एक दिन अचानक उनकी आंखों की रोशनी चली गई। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। ऐसे में चार साल तक पढ़ाई नहीं कर सकीं।
साल 2010 में दोबारा पढ़ाई शुरू की। 2013 में एनआईईवीपीडी पहुंची। इस बीच कंप्यूटर की शिक्षा भी ग्रहण की। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2016 में बैंकिंग सेवा परीक्षा पास करने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा की ईसी रोड शाखा में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर नियुक्त हुईं। बेहतर कार्य के लिए उन्हें एनआईईवीपीडी में तीन दिसंबर-2018 को नेशनल लाइफ अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया।