पिता ने लोन लेकर खरीदे रिकर्व
कीर्ति स्नातक प्रथम वर्ष की छात्रा हैं और पिछले तीन साल से तीरंदाजी करती आ रही हैं। कीर्ति बताती हैं कि बैंकॉक में होने वाले एशिया कप के लिए भी उसका चयन हुआ है। 16 फरवरी से यह प्रतियोगिता शुरू होनी है। राज्य के लिए पदक जीतने वाली कीर्ति को इस बात का भी अफसोस है कि अन्य प्रतिभागियों के पास जो रिकर्व हैं, वे आधुनिक हैं जो बहुत महंगे होने की वजह से उनके पास नहीं हैं। हरियाणा की कांस्य पदक जीतने वाली भावना के मुताबिक, स्कूल में सात साल पहले उसने छात्रों को तीरंदाजी करते देखा। इससे उसमें भी इस खेल के प्रति रुचि पैदा हुई। परिजनों का सहयोग मिला, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसके उपकरण बहुत महंगे हैं। वह बताती हैं, परिजन खेती करते हैं। उन्होंने लोन लेकर मेरे लिए यह रिकर्व खरीदा है। यदि सहयोग मिला तो देश और दुनिया में राज्य का गौरव बढ़ाऊंगी। हरियाणा की अवनी के मुताबिक उन्होंने अपनी बड़ी बहन को देखकर इस खेल की शुरुआत की।
कक्षा नौ के छात्र माधव दिखा रहे प्रतिभा
राष्ट्रीय खेलों की तीरंदाजी प्रतियोगिता में चार बार की ओलंपियन व इस राष्ट्रीय खेल में स्वर्ण पदक विजेता झारखंड की दीपिका कुमारी पहुंची हैं, तो इसी राज्य के कक्षा नौ के छात्र 15 वर्षीय माधव भी इस खेल में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। माधव के मुताबिक, वह पहली बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं।
सफलता के लिए समर्पण और अनुशासन जरूरी : दीपिका
देश की शीर्ष तीरंदाज दीपिका कुमारी बताती हैं कि सफलता के लिए समर्पण और अनुशासन जरूरी है। उसने बताया कि जब उसने खेलना शुरू किया तब आर्चरी को कोई नहीं जानता था। बताना पड़ता था तीरंदाजी वह खेल है जो महाभारत में योद्धा किया करते थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। पिछले 12 से 14 साल में आर्चरी को लोग जानने लगे हैं। खेलों के विकास के लिए काम हो रहा है।