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सालों पुरानी है मोदी की बिजली बचत की ये राह

Wed, 14 Jan 2015 01:33 PM IST
मनीष राठी/ अमर उजाला, श्यामपुर(हरिद्वार)
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एलईडी (प्रकाश उत्सर्जक डायोड) बल्ब को प्रकाश पथ बनाने की मुहिम दिल्ली में भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच जनवरी को शुरू की हो, लेकिन उत्तराखंड में तीन साल पहले ही इसकी शुरुआत हो गई थी। पहले आईआईटी रुड़की में और बाद में प्रदेश के दो गांव एलईडी से रोशन हुए।
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एलईडी से रोशन है रसूलपुर गांव
उत्तराखंड के दो गांव हरिद्वार के रसूलपुर और नैनीताल के रामगढ़ आज एलईडी बल्ब से रोशन हो रहे हैं। उरेडा की पहल और ग्रामीणों की उत्साह के बदौलत एलईडी से न सिर्फ इनके पैसे बच रहे हैं, बल्कि प्रदेश की बिजली भी बच रही है।

भारत सरकार के ऊर्जा कार्य कुशलता ब्यूरो कार्यक्रम के तहत हरिद्वार की रसूलपुर मीठीबेरी ग्राम पंचायत का एलईडी श्रेणी में सितंबर 2013 को चयन किया गया था। योजना के तहत अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण (उरेडा) की ओर से गांव के हर घर में पुराने बल्ब को बदलकर 12 वाट की एलईडी लगाई गई।
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बिजली बिल में आई काफी कमी

रसूलपुर की ग्राम प्रधान ओमवती देवी का कहना है कि एलईडी बल्ब लगाने से हर परिवार के बिजली बिल में काफी कमी आई है। जिस एलईडी बल्ब की बाजार में कीमत करीब 400 रुपए है वह उरेडा की ओर से ग्रामीणों को मात्र 40 रुपए पच्चीस पैसे में दिया जा रहा है।

उरेडा के जिला परियोजना अधिकारी वंदना ने बताया कि गांव में कैंप लगाकर प्रत्येक बिजली कनेक्शन पर चार-चार एलईडी बल्ब ग्रामीणों को दिए जा रहे हैं। ग्राम पंचायत में करीब 620 परिवार हैं। जिनमें से करीब 573 परिवार को एलईडी बल्ब मिल चुके हैं।

मैंने अपने घर में एक साल पहले एलईडी लगाई थी। तब से बिजली का बिल में काफी कमी आई है।
- कमलेश द्विवेदी, ग्रामीण

सेंसर और एलईडी तकनीकी से बनी ट्यूब लाइटों से बिजली बचाई जा सकती है। यदि सेंसर के बिना भी एलईडी लाइटें लगाई जाएं तो भी 50 प्रतिशत बिजली की बचत होती है। यानी हर माह बिजली का बिल (रोशनी पर खर्च) आधे से भी कम होगा।
- प्रो. एके सर्राफ, विभागाध्यक्ष, भू विज्ञान विभाग, आईआईटी रुड़की
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