पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बयान को किसान विरोधी बताया जिसमें उन्होंने कहा कि किसानों की कर्जमाफी का मामला राज्यों के स्तर का है। उन्होंने केंद्र सरकार को जुमलों की सरकार बताते हुए कहा कि जितने भी वादे इस सरकार ने किए थे वे सारे हवाई साबित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि अगस्त तक सरकार ने किसानों के हित में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया तो कांग्रेस दोबारा समीक्षा कर केंद्र सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ने की घोषणा करेगी।
किसानों के बकाया भुगतान की मांग को लेकर लक्सर में सांकेतिक उपवास करने के बाद हरिद्वार पहुंचे रावत हाईवे स्थित एक होटल में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी तब जनकल्याण के लिए काम किया जा रहा था।
उन्होंने मोदी सरकार पर किसानों के साथ छलावा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि न तो गरीबों के खाते में 15 लाख रुपये आए न किसानों का कर्जा माफ हुआ और न ही उनकी आमदनी में बढ़ोत्तरी हुई बल्कि यूपीए सरकार की तुलना में किसानों की आमदनी एनडीए सरकार के कार्यकाल में 25 प्रतिशत तक कम हो गई है।
पिथौरागढ़ के किसान सुरेंद्र सिंह के आत्महत्या करने के मामले में राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई भी मदद की घोषणा नहीं किए जाने को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।