हल्द्वानी स्थित नंधौर अभ्यारण्य में केवल बाघ, हाथी, तेंदुए ही नहीं, बल्कि चिड़ियों की करीब 300 प्रजातियां भी मौजूद हैं। आप वीकेंड एनजॉय करने यहां जा सकते हैं।
इनकी खूबसूरती भी अजग-गजब
इनमें से कुछ चिड़िया ऐसी हैं, जिनके नाम और खूबसूरती अजब-गजब हैं। मसलन, जंगल के अंदर एक कोतवाल चिड़िया है, जो चील से भी भिड़ जाती है।
उसकी दबंगई, तेजी के कारण दूसरी चिड़िया भी उसी के घोंसले के पास ही घोंसला बनाती हैं ताकि उसे सुरक्षा भी मिल सके।
इसी तरह व्हीसलिंग स्कूल बाय चिड़िया है। यह स्कूल जाते समय जैसे कोई बच्चा मीठी सीटी बजाते हुए जाता है, उसी तरह की आवाज निकालती है।
इसी गुण के चलते उसका नाम व्हीसलिंग स्कूल बाय रखा गया। ब्राउन फिशिंग ऑउल के साथ ही बेहद खूबसूरत चिड़िया इंडियन रौलर भी मिलती है।
इसके अलावा घोंसले सिलकर बनाने वाली चिड़िया का नाम ही उसके गुण के आधार पर टेलर बर्ड पर पड़ गया। यह चिड़िया बुनाई करने वाली बीवर (बया) से अलग होती है।
इन चिड़ियों को कैमरे में कैद कर फोटो उप निदेशक प्रकाश आर्य ने भेजी है। इसके अलावा पीठ पर राख जैसे रंग रखने वाली एसप्रीनिया, मधुमक्खियों को ही खाने वाली ग्रीन बीइर्टर, सफेद आंख वाली ओरियंटल जैसी चिड़िया भी नंधौर अभ्यारण्य में दिखती है।
इनके आकर्षक के चलते पहली बार देखने वाला व्यक्ति इन्हें एकटक देखता रह जाता है।
चिड़ियों की 300 प्रजातियां मौजूद
उप निदेशक प्रकाश आर्य कहते हैं कि विश्व में चिड़ियों की 1200 प्रजातियां हैं, इनमें 600 परिंदे देश में रिपोर्ट है। इनमें भी 300 तरह की चिड़िया नंधौर अभ्यारण्य में मौजूद हैं।