नंदा देवी राजजात कार्यक्रम के संयोजक अनिल गोदियाल ने कहा कि यह उत्तराखंड की विशिष्ट लोक परंपराओं में शामिल है। इसमें धार्मिक आस्था के साथ लोकगीत, लोकनृत्य और सामुदायिक सहभागिता का अनूठा संगम है। कलाकारों ने मां नंदा को मायके से कैलाश विदा किए जाने की लोक भावना को मंच पर साकार किया।
कार्यक्रम के समापन पर मां नंदा की डोली को शहीद स्थल तक ले जाया गया। वहां शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और राष्ट्रभक्ति का संगम देखने को मिला। कार्यक्रम के निर्देशक हेमंत बुटोला और मंच संचालक विजय बिंदवाल रहे। राम कौशल टीम ने रेणुका माता के भजन और उत्तराखंड की लोकधुनों पर प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों में पहाड़ के पारंपरिक जीवन की झलक मिली।
स्टार नाइट में लोकधुनों पर थिरके दर्शक
शरदोत्सव के दूसरे दिन की स्टार नाइट में लोक गायिका संगीता ढौंढियाल ने कई गीत प्रस्तुत किए। ढोल-दमाऊ की धुनों और पहाड़ी लोकगीतों ने दर्शकों को अपनी ओर खींचा। उनके गीतों पर लोगों ने जमकर नृत्य किया। इसके बाद लोक गायक गजेंद्र राणा ने अपने गीतों से माहौल में जोश भर दिया। गजेंद्र राणा के गीत शुरू होते ही दर्शक उत्साह से झूम उठे और देर रात तक गढ़वाल टैरेस तालियों और पहाड़ी लोकधुनों से गूंजता रहा।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
नगर पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। यह यहां के सामाजिक जीवन, प्रकृति, रिश्तों और सामूहिक स्मृतियों से गहराई से जुड़ी है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी और पर्यटकों को प्रदेश की लोक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। नगर पालिका अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने कहा कि पालिका का उद्देश्य लोक कला के संरक्षण, संवर्धन और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है।