गत वर्ष आई आपदा से एक साल पीछे खिसकी नंदा देवी राजजात यात्रा को शुरू होने में कुछ दिन शेष रह गए हैं। बावजूद इसके तैयारियां अपेक्षित नहीं हैं।
सबसे बुरी स्थिति राजजात ट्रैक को जोड़ने वाले मोटर मार्गों की है। सड़कें दुरुस्त न होने पर इसका सीधा असर यात्रा पड़ावों में होने वाले कामों पर पड़ेगा। राजजात ट्रैक की रेकी कर वापस लौटी एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) और निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी ने भी सड़कों की स्थिति सुधारने की जरूरत बताई है।
बेहद खराब हैं सड़कें
नंदा देवी राजजात ट्रैक का शुरुआती पड़ाव वाण देवाल-लोहाजंग मोटर मार्ग से जुड़ा है जबकि आखिरी छोर का पड़ाव सुतोल घाट-सतोल मोटर मार्ग से जुड़ा हुआ है।
लोहाजंग से वाण तक नौ किमी सड़क बेहद खराब है। इससे बुरी स्थिति 28 किमी लंबे घाट-कनोल-सतोल मार्ग की है।
डोजर में डीजल ही नहीं
राजजात ट्रैक की रेकी से लौटने पर टीम को सतोल से 21 किमी अतिरिक्त पैदल चलना पड़ा। इस मार्ग पर जगह-जगह मलबा आने से सड़क नहीं दिखाई दे रही है। टीम को एक स्थान पर ही डोजर दिखाई दिया। वहां मौजूद कर्मियों ने बताया कि डीजल नहीं होने से मशीन खड़ी है।
वाण से सुतोल तक 75 किमी ट्रैक पर बिजली-पानी और रसद की सप्लाई सहित रहने के लिए अस्थायी हट्स बनने हैं। सड़कों की स्थिति नहीं सुधरने से सारी व्यवस्थाएं गड़बड़ा जाएंगी।