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नंदा राजजात यात्रा से पहले खुली मुसीबतों की पोल

Mon, 11 Aug 2014 08:59 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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पिछले एक साल से चल रही नंदा राज जात की तैयारी पर अब आखिरी क्षणों में सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
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हाल यह है कि यात्रा शुरू होने में कुल दस दिन बाकी है और अभी तक यात्रा मार्ग पर वन विभाग और पेयजल विभाग ने कोई काम ही नहीं किया है।

यह हाल वाण से आगे के करीब 70 किलोमीटर तक के यात्रा मार्ग का है। नंदा देवी जात केयात्रा मार्ग का अधिकतर हिस्सा उच्च हिमालय क्षेत्र का है।

मुसीबतों की भरमार

मुसीबत यह है कि यहां मौसम पल-पल बदलता है। इसके साथ ही यात्रा मार्ग के पूरे एक हिस्से पर जोंकों की भरमार है। ऐसे में बदलते हुए मौसम से जूझने के लिए यात्रियों के रहने और खाने का इंतजाम करना अपने आप में खासी चुनौती है।

वाण से आगे का रास्ता करीब-करीब निर्जन है और यहां पर यात्रियों की संख्या जितनी अधिक होगी, रहने और खाने का इंतजाम उतना ही अधिक मुश्किल होगा।

सूत्रों के मुताबिक इस रूट का हाल ही में एक मात्र निम और अन्य संस्थाओं की टीम ने जायजा लिया। इस टीम ने कम से कम तीन डेंजर जोन चिह्नित किये हैं। ये तीनों डेंजर जोन वाण और होमकुंड के बीच के हैं।
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पत्थरों के गिरने का डर

इसमें एक जगह बिना किसी सहारे के करीब तीस मीटर के पैच को पार करना होगा। दूसरे डेंजर जोन में पत्थरों के गिरने का डर है। तीसरे डेंजर जोन में रास्ता बेहद फिसलन वाला है।

हद तो यह है कि न तो अभी यह रास्ता तैयार किया गया है और न ही पेयजल विभाग ने पानी की कोई व्यवस्था की है। इस क्षेत्र में जोंक बहुत है और प्राकृतिक स्रोत का पानी यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

यात्रा समिति के अध्यक्ष और विधानसभा उपाध्यक्ष एके मैखुरी का कहना है कि यात्रा की तैयारी पर लगातार निगाह रखी जा रही है। कोशिश यह है कि यात्रा के शुरू होने से पहले एक बार पूरी व्यवस्था का जायजा ले लिया जाए।
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