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नमामि गंगे योजना में घाटों का निर्माण शुरू

Sun, 30 Apr 2017 03:01 PM IST
हेमवती नंदन भट्ट/ अमर उजाला, ऋषिकेश
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flood in saung river rishikesh - फोटो : file pic
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पौड़ी के यमकेश्वर प्रखंड और द्वारीखाल प्रखंड के सैकड़ों गांवों को जल्द नमामि गंगे योजना के अंतर्गत गंगा तट पर स्नान घाट के साथ ही पक्के श्मशान घाट की सहूलियत मिलेगी। अभी अंतिम संस्कार नदी किनारे जमा भारी बोल्डरों के बीच करना पड़ता है। अब लोगों को इस दिक्कत से निजात मिल सकेगी।
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घाट की खासियत यह होगी कि लोगों को बरसात के दिनों में बाढ़ के समय और ग्रीष्मकाल में गंगा के जलस्तर में न्यूनतम गिरावट आने की स्थिति में भी नदी तट तक सुगम आवागमन की सुविधा रहेगी। इसके लिए घाट का लेवल हाईफ्लर्ड लेवल पर रखा गया है, जबकि गंगा की तलहटी तक सीढ़ियों का निर्माण योजना में शामिल है। 

केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के अंतर्गत प्राचीन बदरीनाथ धाम पैदल मार्ग स्थित फूलचट्टी में गंगा तट पर श्मशान घाट और स्नान घाट योजना को मंजूरी मिली है। निर्माण एजेंसी ने योजना पर काम भी शुरू कर दिया है।
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यहां घाटों का निर्माण होने से यमकेश्वर प्रखंड के लगभग सवा दो सौ गांवों और द्वारीखाल ब्लाक के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को पक्के घाट बनने से गंगा स्नान की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही प्राचीन नीलकंठ धाम के दर्शन के लिए पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालु भी यहां स्नान कर सकेंगे। इस स्थान पर ग्रामीण इलाकों का सदियों पुराना श्मशान घाट है। 
 
सुविधाओं से युक्त होगा स्नान घाट
योजना के अंतर्गत 572 मीटर स्नान घाट के लिए 2.26 करोड़ की मंजूरी मिली है। जिसमें घाट के प्लेटफार्म के साथ ही चेंज रूम, टॉयलेट विद बायोडाइजेस्टर एंड रीडबेड, पेयजल की सुविधा, आराम करने के लिए चबूतरे, छतरी, प्रेयर हॉल और सोलर लाइट पोल आदि स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा योजना के तहत 580 मीटर श्मशान घाट के लिए 2.76 करोड़ की मंजूरी दी गई है। जिसके तहत प्लेटफार्म, प्रेयर हॉल, टॉयलेट ब्लाक, डस्टबीन आदि की सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।  

बाढ़ में सुरक्षित रहेंगे घाट
यमकेश्वर से निकलने वाली हेंवल नदी और गंगा के संगम पर प्रस्तावित इन प्रोजेक्टों को तैयार करने के लिए देश की सभी सात आईआईटी के इंजीनियरों के पैनल थर्ड पार्टी एप्रूवल कमेटी टीपीए से तकनीकी परीक्षण व सुझाव लिए गए हैं। जिससे योजना को किसी प्रकार का खतरा नहीं हो। सुरक्षात्मक उपायों के तहत दोनों घाटों के निर्माण के लिए घाटों के चारों ओर पांच मीटर गहरी रिटेर्निंग वॉल, वायरक्रेट आदि बनाए जाएंगे, जिससे बरसात में गंगा में बाढ़ आने की स्थिति में भी घाटों को किसी प्रकार का नुकसान न हो।  

गंगा में आने वाली बाढ़ के 100 साल के अध्ययन के बाद इस प्रोजेक्ट को तैयार किया गया है। जिसमें घाटों का लेवल पानी की अधिकतम ऊंचाई पर रखा गया है। साथ ही ग्रीष्मकाल में गंगा तक पहुंचने के लिए रिवर इंटर फेस गंगा की तलहटी तक सीढ़ियों का निर्माण किया जाएगा, जिससे लोगों को स्नान व दाह संस्कार के लिए गंगा तट तक पहुंचने में कोई दिक्कत न हो। 
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- अमित शर्मा, प्रोजेक्ट मैनेजर वेवकॉस (केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय का उपक्रम)
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