हरिद्वार में गंगा को सीवर की गंदगी से मुक्ति मिलने की उम्मीद जगी है। जगजीतपुर में पहले से ही दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित हैं।
अब 40 एमएलडी के तीसरे प्लांट के लिए भी जीओ जारी हो गया है। नमामि गंगे योजना के तहत उत्तराखंड का यह पहला प्रोजेक्ट हरिद्वार के लिए मंजूर हुआ है। इसका काम निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) की देखरेख में होगा। उसने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पर काम भी शुरू कर दिया है। एसटीपी निर्माण की कार्य अवधि 15 माह निर्धारित की गई है और इसके लिए 71 करोड़ 40 लाख रुपए बजट रखा गया है।
नया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का यह प्रोजेक्ट सितंबर 2014 से फाइलों में चल रहा था और मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अक्तूबर 2014 में इसका निर्माण अर्द्धकुंभ-2016 से पूर्व पूरा करवाने की घोषणा की थी।
लेकिन योजना की मंजूरी में इतना विलंब हुआ कि अब यह वर्ष 2017 में ही तैयार हो पाएगा। ऐसे में अगले साल लगने वाले अर्द्धकुंभ मेले में श्रद्धालुओं को मैली गंगा में ही डुबकी लगानी होगी।
जगजीतपुर में प्रस्तावित 40 एमएलडी के एसटीपी प्रोजेक्ट का जीओ 28 सितंबर को जारी हो गया है। शासन ने नवंबर-2014 में इस प्रोजेक्ट को नमामि गंगे योजना में प्रस्तावित करवाया था। विशेषज्ञों की मुहर लगने के बाद इसे दोबारा प्रस्तुत किया गया। इस प्रोजेक्ट को आगामी 10 साल तक की सीवरेज की जरूरत के मुताबिक तैयार किया गया है।
- आरके जैन, परियोजना प्रबंधक, निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा), हरिद्वार
अभी दो प्लांट कर रहे काम
जगजीतपुर में जल संस्थान के पास अभी 28 और 17 एमएलडी के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट है। जल संस्थान का दावा है कि करीब 20 एमएलडी से अधिक सीवर बिना शोधन के सीधे गंगा में बहाया जा रहा है। जबकि कई क्षेत्रों में सीवर लाइन न होने के चलते अधिकतर लोग जमीन के अंदर सेफ्टी टैंक बनवाकर काम चला रहे हैं।