एनटीसीए के मानकों के तहत पोस्टमार्टम
कॉर्बेट पार्क के निदेशक ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की एसओपी के मानकों के अनुसार गठित कमेटी के सदस्यों और कालागढ़ टाइगर रिजर्व के डीएफओ नीरज शर्मा की मौजूदगी में बाघिन के शव का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा और डॉ. हिमांशु पांगती ने किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट
-कॉर्बेट पार्क के निदेशक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बाघिन की मृत्यु दाहिने पैर की जांघ में छर्रे लगने पर शरीर से बहुत अधिक खून निकलने से हुई थी।
-बाघिन के लीवर में लगभग 10 सेमी का एक सेही का कांटा भी पाया गया। इससे लीवर को भी काफी क्षति हो गई थी।
-बाघिन का पेट और आंतें पूरी तरह खाली थीं।
-उसके फेफड़ों में भी क्षति हुई है।
-बाघिन के दाहिने जांघ में 12 बोर की बंदूक के छर्रे पाए गए।
प्राथमिक जांच के आधार पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धाराओं के तहत बाघिन की मृत्यु से संबंधित केस टू वन आरक्षी धीरज सिंह के विरुद्ध दर्ज किया गया। वन आरक्षी को कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग की पलेन रेंज कार्यालय संधीखाल से संबद्ध कर दिया गया है। डीएफओ कालागढ़ ने इस केस की जांच के लिए एसडीओ हरीश नेगी को जांच अधिकारी नामित किया है। इस प्रकरण की जांच जारी है।
- डॉ. धीरज पांडेय, निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व पार्क