जियो मैपिंग और भौतिक सत्यापन के निर्देश
मुख्य सचिव ने प्रदेश की प्रमुख पेयजल योजनाओं की जियो मैपिंग एवं जीआईएस जियो-रेफरेंसिंग कराने के निर्देश दिए। कहा कि जल आपूर्ति प्रणाली में स्रोत से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने, भंडारण, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग पॉइंट आदि तक पूरे नेटवर्क की मैपिंग कराई जाए। अगले 15 दिनों में प्रदेशभर की प्रमुख पेयजल योजनाओं का भौतिक सत्यापन कराया जाए। इस दौरान सोर्स, स्टोरेज, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग पाइंट्स और उपभोक्ता के स्तर पर संभावित लीकेज की जांच की जाए। उन्होंने पेयजल एवं सीवरेज लाइनों के क्रॉसिंग प्वाइंट्स को विशेष रूप से चिह्नित कराने, जहां पुराने पाइप हैं उन्हें बदलने के निर्देश दिए।
इंदौर घटना के बाद बनी थी एसओपी, अनुपालन कहां नहीं हुआ
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि इंदौर की घटना के बाद विस्तृत एसओपी जारी की गई थी। इसके बावजूद यदि कहीं पेयजल दूषित होने की स्थिति सामने आती है तो यह देखना आवश्यक है कि एसओपी का पालन किस स्तर पर नहीं हुआ और उसके कारण क्या रहे। निर्देश दिए कि पेयजल लाइनों एवं सीवरेज लाइनों की जांच के लिए स्पष्ट एसओपी तैयार की जाए। उसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
ये भी पढ़ें...देहरादून: महंगे शौक के लिए बने ड्रग पैडलर, छह छात्र गिरफ्तार, पुलिस का दावा-दिल्ली के सिद्धू गैंग से हैं जुड़े
सतत निगरानी होगी, शिकायत पर तत्काल पहुंचेंगी स्वास्थ्य टीम
मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि जहां भी दूषित पेयजल अथवा इस प्रकार के मामले सामने आते हैं, वहां तत्काल स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाए। सीएमओ एवं सीएमएस स्तर की व्यवस्थाओं को सक्रिय करते हुए डॉक्टरों की टीम को सक्रिय रखा जाए। अगले 15 दिनों में प्रदेशभर में आवश्यक स्वास्थ्य सर्विलांस एवं जांच की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जिला स्तर पर गठित समितियां केवल औपचारिक बैठक तक सीमित न रहें। कहा कि यह व्यवस्था एक बार का अभ्यास नहीं बल्कि स्थायी निगरानी तंत्र के रूप में विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग अपने पूर्व इंजीनियरों के अनुभव का भी लाभ ले।