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कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अब शादी में नहीं ले जा सकेंगे हथियार

Fri, 28 Jul 2017 09:18 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, नैनीताल
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nainital high court
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नैनीताल हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक कार्यक्रम, शादी समारोह, स्कूल, कॉलेज कैंपस या किसी भी ऐसे कार्यक्रम में जहां भीड़ एकत्रित हो वहां हथियार लेकर कोई न जाए।
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निचली अदालत बागेश्वर की ओर से हत्या के अभियुक्त को दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। साथ ही कोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलों के एसएसपी को आदेशित किया है कि वे 21 साल से कम उम्र वालों को बंदूक का लाइसेंस न दें।

पिछले पांच साल में जिस व्यक्ति को झगड़े या हिंसा के लिए कोई सजा मिली हो उन्हें भी लाइसेंस न दें। जिस व्यक्ति को शांति बनाए रखने के लिए बांड भरवाया गया हो उसे भी लाइसेंस न दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक कार्यक्रम, शादी समारोह, स्कूल, कॉलेज कैंपस या किसी भी ऐसे कार्यक्रम में जहां भीड़ एकत्रित हो वहां हथियार लेकर कोई न जाए। 
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बुधवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। भगवान सिंह ने अपील दायर कर निचली अदालत बागेश्वर की ओर से पारित 12 जुलाई 2013 के आदेश को चुनौती दी थी। उक्त आदेश में निचली अदालत ने अभियुक्त भगवान सिंह को हत्या के प्रयास और हत्या करने के मामले में आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। 

ये था मामला
मामले के अनुसार धरम सिंह ने 21 अप्रैल 2007 को थाना बागेश्वर में मुकदमा दर्ज कर आरोप लगाया था कि अभियुक्त के बेटे की शादी थी। बारात की वापसी पर अभियुक्त ने फायर किया, जिसमें अनिता, खुशहाल सिंह, उमीद सिंह, विमला को छर्र लगे। सभी को अस्पताल ले जाया गया, जहां अनीता और खुशहाल सिंह की मौत हो गई। इस मामले में निचली अदालत ने अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

डेंटल सर्जनों भर्ती परीक्षा परिणाम घोषित करने पर रोक

डेमो - फोटो : demo pic
हाईकोर्ट ने राज्य में 203 डेंटल सर्जन भर्ती का परीक्षा परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है। मेडिकल सेलेक्शन बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि जिन ओएमआर शीटों में छेड़छाड़ की गई है उन्हें सील कवर में कोर्ट में पेश किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी। 

मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। नैनीताल निवासी ललित उप्रेती ने याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने इसी वर्ष 203 डेंटल सर्जनों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके बाद मेडिकल सेलेक्शन बोर्ड की ओर से भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि लिखित परीक्षा की ओएमआर शीट में छेड़छाड़ की गई है। इसकी शिकायत होने के बावजूद मेडिकल सेलेक्शन बोर्ड ने 24 से 28 जुलाई तक साक्षात्कार की तारीख तय कर दी। याचिकाकर्ता की ओर से साक्षात्कार को नियम विरुद्ध बताते हुए भर्ती प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की गई थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाइकोर्ट की खंडपीठ ने परीक्षा परिणाम पर रोक लगा दी है। ब्यूरो
 
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रोडवेज में चालक-परिचालक भर्ती 

uttarakhand roadways
हाईकोर्ट ने रोडवेज में चालक और परिचालक की भर्ती प्रक्रिया को शुरू करने को सशर्त मंजूरी दे दी है। इसके तहत विभाग में पूर्व से संविदा के रूप में कार्यरत कर्मचारियों को वरिष्ठता दी जाएगी। कोर्ट का यह आदेश याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

बुधवार को न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि परिवहन निगम 2968 चालक, परिचालक और अन्य पदों पर सीधी भर्ती कर रहा है। इससे विभाग में वर्षों से संविदा के रूप में कार्यरत संविदा कर्मियों के हित प्रभावित हो रहे हैं।

याचिका में कहा कि परिवहन निगम इन कर्मचारियों को आउटसोर्सेस से भर्ती  मानते हैं जबकि ये कर्मचारी आउटसोर्सेस ऐजेंसी से नियुक्त न होकर विभागीय संविदा पर नियुक्त है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाइकोर्ट की एकलपीठ ने अंतरिम आदेश पारित कर परिवहन निगम को इस शर्त के साथ भर्ती करने की इजाजत दी है कि निगम पूर्व से कार्यरत चालक, परिचालक और अन्य कर्मचारियों की वरिष्ठता नए भर्ती होने वाले कार्मिकों से ऊपर मानी जाएगी। कोर्ट ने पूर्व में इस भर्ती प्रक्रिया में रोक लगा दी थी।
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