ऋषिकेश में गंगा नदी के किनारे अतिक्रमण करने और अधिकारियों की मिलीभगत से इस पर आश्रम बनवाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसके दौरान हाईकोर्ट ने डीएम पौड़ी को आदेश दिए हैं कि वह 6 जनवरी तक दोबारा जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें। साथ ही न्यायालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए। पूर्व में पारित आदेश के क्रम में डीएम पौड़ी न्यायालय में रिपोर्ट के साथ पेश हुए।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हाईकोर्ट के अधिवक्ता हरिद्वार निवासी विवेक शुक्ला ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि ऋषिकेश में परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम ने गंगा नदी के किनारे 70 मीटर परिक्षेत्र में कब्जा किया हुआ है। जिस जमीन पर कब्जा किया गया है वह सरकारी है। याचिका में कहा कि गंगा में पुल का निर्माण कर नदी में एक मूर्ति स्थापना सहित व्यावसायिक भवन का निर्माण किया गया है।
इसको बैंक अथवा अन्य को किराए पर भी दिया गया है। याचिका में कहा गया कि इसका किराया आश्रम द्वारा लिए जाने के कारण सरकार को राजस्व की हानि हो रही है। याचिका में यह भी कहा गया कि आश्रम से होने वाले कूड़े को गंगा नदी में डाला जा रहा है, जिससे गंगा भी प्रदूषित हो रही है। याचिकाकर्ता की ओर से इस पर रोक लगाने के साथ ही इस स्थान को अतिक्रमण मुक्त करने की गुहार लगाई है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 जनवरी की तिथि नियत की।