एसएसपी हरिद्वार की ओर से गठित टीम ने नाबालिग को सिविल जज के सरकारी आवास से बरामद करने का दावा किया था। सिविल जज पर किशोरी के मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का आरोप था। पूछने पर किशोरी ने खुद को नैनीताल के पदमपुरी इलाके का बताया था। उसके शरीर पर चोट के निशान देख उसे मेडिकल जांच के लिए महिला चिकित्सालय हरिद्वार ले जाया गया, जहां 20 से अधिक चोटों की पुष्टि हुई।
किशोरी को बाद में बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया। किशोरी के मेडिकल रिपोर्ट की प्रतिलिपि जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सौंपी गई। उधर जिला जज की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने सिविल जज को निलंबित कर दिया था। गिरफ्तारी से बचने और प्राथमिकी निरस्त करने की मांग को लेकर सिविल जज ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इधर, हाईकोर्ट पूर्व में ही सिविल जज को बहाल करने के आदेश पारित कर चुका है।