1982 में बांध का पहले चरण का काम पूर हुआ। इसके तहत गौला बैराज का निर्माण किया गया और 40 किलोमीटर की नहरें बनीं। 1988 में केंद्रीय जल आयोग से इसकी अनुमति मिली उस वक्त बांध की लागत 144.84 करोड़ पहुंच गई।
याचिका में कहा गया कि बांध निर्माण से उत्तर प्रदेश को 47 हजार और उत्तराखंड को नौ हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने, बिजली उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया था। 2014 में फिर से डीपीआर बनाई गई, जिसमें लागत 2350.56 करोड़ पहुंच गई। बांध को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच समझौता नहीं हो सका।