कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। रमेश चंद्र लोहनी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि देहरादून से स्थानांतरित कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने सरकारी आवासों पर कब्जा नहीं छोड़ा है।
इससे अन्य कार्मिकों को कई असुविधाओं से गुजरना पड़ रहा है। 16 अगस्त 2018 को एकलपीठ ने याचिका को जनहित का मानते हुए इसे कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ को भेज दिया था।
कोर्ट ने इस मामले में शपथ पत्र पेश करने के आदेश सरकार को दिए थे। सरकार के शपथ पत्र से 19 अफसरों और कर्मचारियों की ओर से अनाधिकृत कब्जे की पुष्टि हुई। कोर्ट ने ऐसे कब्जों को दो महीने के भीतर खाली करवाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश मुख्य सचिव को दिए हैं।