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उत्तराखंड: परमार्थ निकेतन में गंगा किनारे अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

Thu, 19 Sep 2019 09:48 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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हाईकोर्ट ने परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम (ऋषिकेश) के खिलाफ गंगा नदी किनारे अतिक्रमण के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार और अन्य को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।  

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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।  हाईकोर्ट के अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम ने गंगा किनारे 70 मीटर भूमि पर कब्जा कर लिया है। यह भूमि राज्य सरकार की है और इस स्थान पर गंगा में पुल का निर्माण किया जा रहा है।

साथ ही नदी में एक मूर्ति भी बनाई जा रही है। याचिका में कहा कि यहां बनाए गए व्यावसायिक भवन को बैंक और अन्य लोगों को किराए पर दिया गया है। इसका किराया आश्रम के पास जमा हो रहा है, जिससे सरकारी राजस्व की हानि भी हो रही है।
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याचिका में यह भी कहा कि यहां चल रही गतिविधियों के दौरान होने वाले कूड़े को गंगा नदी में डाला जा रहा है। याचिका में इस पर रोक लगाने की मांग की गई। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ सरकार को इस संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं

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