नैनीताल जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम राजीव कुमार खुल्बे ने पांच साल पूर्व दिनेशपुर के थानाध्यक्ष रजत कसाना को पांच लाख रुपये रिश्वत देने के आरोप में गिरफ्तार नोएडा के तीन लोगों को पांच-पांच साल का सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 13 सितंबर 2015 को दिनेशपुर के थानाध्यक्ष रजत कसाना को धोखाधड़ी से संबंधित एक मुकदमे से आरोपी रवींद्र का नाम हटाने के लिए तीन व्यक्तियों ने पांच लाख रुपये रिश्वत देने की कोशिश की, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
गिरफ्तार लोगों में राधेश्याम पुत्र रमाकांत निवासी के-202 रेल विहार, अल्फा नं.1. ग्रेटर नोएडा, रविशंकर मिश्रा पुत्र जितेंद्र निवासी-107 पारसनाथ, इंडियन सेक्टर अल्फा-2 ग्रेटर नोएडा और मोहन द्विवेदी पुत्र सुरेंद्र निवासी ई-115, बीटा प्रथम ग्रेटर नोएडा थे।
तीनों आरोपियों ने क्षेत्राधिकारी बाजपुर राजीव के पूछताछ करने पर बताया कि वह धोखाधड़ी से संबंधित मुकदमे से रवींद्र का नाम हटाने के लिए पांच लाख रुपये रिश्वत विवेचक/थानाध्यक्ष रजत कसाना को देने आए थे। रवींद्र आरोपी राधेश्याम का भाई है। आरोपियों से बरामद पांच लाख रुपये सीलबंद कर आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की विवेचना कर तत्कालीन क्षेत्राधिकारी बीएस चौहान ने आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए थे।
अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने पैरवी के दौरान अभियोजन तथ्यों को साबित करने के लिए सात गवाह पेश किए। जनता का एक गवाह अनादि रंजन मंडल को अभियोजन साक्ष्य के रूप में पेश किया गया, लेकिन उसके द्वारा अभियोजन तथ्यों का समर्थन न करने पर उसे पक्षद्रोही घोषित किया गया।
शर्मा ने यह तर्क भी रखा कि आरोपियों ने एक ईमानदार छवि के पुलिस अधिकारी को पांच लाख रिश्वत देने की प्रयास किया और उनके पास से रिश्वत के नोट भी बरामद हुए हैं। इन तर्कों के बाद कोर्ट ने तीन आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए उन्हें पांच पांच साल के सश्रम कारावास और दस दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।