सिंगापुर से पहुंचे हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. डेविड कोह ने शोध छात्रों को वायु प्रदूषण के कारण मानव स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्परिणामों के बारे में बताया। डॉ. कोह ने कहा कि जरूरी है कि समय रहते शोध कार्य किए जाएं, जिससे उसके निष्कर्षों का लाभ वायु प्रदूषण को रोकने के लिए किया जा सके।
एरीज के वायुमंडलीय वैज्ञानिक और कार्यशाला के समन्वयक डॉ. मनीष नाजा ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से एशियाई क्षेत्र में वायु प्रदूषण तेजी से फैल रहा है। कहा कि वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए ठोस उपाय करने जरूरी हैं। इसे देखते हुए ही यहा तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है, इसमें एशिया के अलग-अलग विषयों के 60 वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं।
कार्यशाला में भारत, जापान, चीन, इंडोनेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड और कंबोडिया समेत अन्य देशों के वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में इसरो के प्रो. श्याम लाल और डॉ. सुरेश बाबू समेत कई वैज्ञानिक मौजूद रहे।