राजधानी दून में सफाई व्यवस्था ठीक न होने के पीछे बड़ा कारण है डीवीडब्ल्यूएम कंपनी पर वर्क लोड। कंपनी की काम करने की क्षमता केवल तीस वार्डों की है जबकि उससे साठ वार्डों का कूड़ा उठवाया जा रहा है।
इसके अलावा कंपनी नगर निगम में चल रही सियासत की भी शिकार है। इन्हीं सब पचड़ों के चलते कंपनी का पेमेंट फंस हुआ है।
बुधवार को कांग्रेसी और भाजपा पार्षदों ने कूड़ा उठाने वाली कंपनी डीवीडब्ल्यूएम से 30 वार्ड हटाने की मांग की। पार्षदों ने मांग की है कि कूड़ा उठाने की व्यवस्था पूर्व की तरह ही रखी जाए।
नेता प्रतिपक्ष नीनू सहगल ने बताया कि कंपनी की क्षमता इतने वार्डों से कूड़ा उठाने की नहीं है।
ऐसे में कंपनी से पहले 15 वार्ड हटा लेने चाहिए। कंपनी पर भार कम होगा तो वह सही तरीके से काम कर पाएगी। वहीं निगम को कंपनी का भुगतान भी कर देना चाहिए।
भुगतान न होने से कंपनी के लगभग दो सौ कर्मचारियों को वेतन अटका हुआ है।
उधर, भाजपा पार्षद भूपेंद्र कठैत ने बताया कि बोर्ड बैठक में भी केवल तीस वार्डों के से कूड़ा उठाने का जिम्मा कंपनी को देने के लिए कहा गया था।
उन्होंने बताया कि कूड़ा उठाने का काम कंपनी से लेकर पूर्व की तरह निगम के कर्मचारियों को सौंप देना चाहिए। मेयर विनोद चमोली ने बताया मामले को देखा जा रहा है। इस संबंध में कंपनी के अधिकारियों से बात की जाएगी।