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उत्तराखंड: रद्द होगी नैक मूल्यांकन न कराने वाले महाविद्यालयों की मान्यता, प्राचार्य के खिलाफ होगी कार्रवाई

Fri, 18 Nov 2022 03:20 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप महाविद्यालयों में ग्रीन कैंपस, तंबाकू मुक्त कैंपस बनाने के लिए समितियों का गठन करने के साथ ही एनसीसी, एनएसएस एवं रोवर रेंजर की इकाई स्थापित की जाएंगी। इसके साथ ही छात्र-छात्राओं की डिजीटल हेल्थ आईडी बनेगी और उनके ब्लड ग्रुप की जांच महाविद्यालय स्तर पर की जाएगी।
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धन सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश के समस्त महाविद्यालयों को नैक मूल्यांकन अनिवार्य रूप से कराना होगा, इसके लिए सभी राजकीय एवं अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों को मार्च 2023 तक का समय दिया गया है। ऐसा न करने वाले महाविद्यालयों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। वहीं संबंधित प्राचार्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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यह कहना है उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का। मंत्री ने सचिवालय में विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इसके निर्देश दिए। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए महाविद्यालयों को कम से कम 180 दिन कक्षाएं चलानी होंगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप महाविद्यालयों में ग्रीन कैंपस, तंबाकू मुक्त कैंपस बनाने के लिए समितियों का गठन करने के साथ ही एनसीसी, एनएसएस एवं रोवर रेंजर की इकाई स्थापित की जाएंगी। इसके साथ ही छात्र-छात्राओं की डिजीटल हेल्थ आईडी बनेगी और उनके ब्लड ग्रुप की जांच महाविद्यालय स्तर पर की जाएगी।
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मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद के सहयोग से दिसंबर में विभिन्न जिलों में पांच सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। जहां नैक मूल्यांकन के लिए आवश्यक जानकारी दी जाएगी ताकि नैक मूल्यांकन में महाविद्यालयों को सहूलियत हो सके। बैठक में विभागीय मंत्री ने राजकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को एंटी ड्रग्स सेल का गठन करने के साथ ही महाविद्यालयों में एनएसएस, एनसीसी एवं रोवर्स रेंजर की इकाईयां स्थापित करने व शिक्षकों एवं कार्मिकों के साथ ही छात्र-छात्राओं की भी बायोमैट्रिक उपस्थिति लिए जाने के निर्देश दिए। 

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स्वैच्छिक रक्तदान के लिए पंजीकरण कराने को कहा
इसके अलावा उन्होंने समस्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों से टीबी मुक्त उत्तराखंड अभियान से जुड़ कर एक-एक टीबी मरीज गोद लेने, छात्र-छात्राओं की डिजीटल हेल्थ आईडी बनाने, प्रत्येक छात्र-छात्राओं के ब्लड ग्रुप की पहचान करने व स्वैच्छिक रक्तदान के लिए पंजीकरण कराने को कहा। 

बैठक में निर्णय लिया कि सभी राजकीय महाविद्यालयों में 4-जी कनेक्टीविटी के लिए संबंधित प्राचार्य किसी भी नेटवर्क कंपनी से उपलब्धता के आधार पर कनेक्शन ले सकते हैं। जिसका भुगतान मासिक या वार्षिक आधार पर छात्र निधि से प्राप्त धनराशि से किया जा सकता है। 

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बैठक में सचिव उच्च शिक्षा शैलेश बगोली, अपर सचिव प्रशांत आर्य, सलाहकार रूसा प्रो. एमएसएम रावत, प्रो केडी पुरोहित, निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. प्रवीन जोशी, संयुक्त निदेशक प्रो. एएस उनियाल के साथ ही 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे जबकि राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
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