कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अब वन कर्मी मैसूर के हाथियों से गश्त करेंगे। कर्नाटक के मैसूर से पांच दिन का सफर तय कर नौ हाथी कालागढ़ पहुंच गए हैं। इन हाथियों को उत्तराखंड के जंगलों और यहां की आबोहवा के अनुकूल बनाने के प्रयास शुरू हो गए हैं।
कर्नाटक राज्य से पांच दिनों का सफर ट्रकों से तयकर कार्बेट टाइगर रिजर्व में नौ हाथी शनिवार की सुबह पहुंच गए हैं। इन हाथियों को कालागढ़ में ऐलीफेंट कैंप में रखा गया है। हाथियों के साथ उनके महावत व अन्य कर्मचारी भी आए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन हाथियों को कार्बेट टाइगर रिजर्व की सुरक्षा को मजबूत करने और गश्त करने के उद्देश्य से लाया गया है।
खासकर कार्बेट के जंगलों में अवैध शिकार पर रोक लगाने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। कालागढ़ पहुंचते ही कर्नाटक के इन हाथियों का मेडिकल चैकअप कार्बेट टाइगर रिजर्व के डा. दुष्यंत कुमार ने किया।
उन्होंने सभी हाथियों को स्वस्थ बताया। कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक अमित वर्मा ने बताया कि हाथी 90 दिनों के लिए कालागढ़ में ही रहेंगे। इस दौरान इनका रखरखाव और व्यवहार समझा जाएगा। इसके बाद इन्हें कार्बेट के हाथियों के अनुसार प्रशिक्षित किया जाएगा। इन हाथियों के आने से विभाग में उत्साह बना है।