माउंट एवरेस्ट समेत देश की कई चोटियों की खोज करने वाले सर जॉर्ज एवरेस्ट के हाथीपांव के पार्क रोड क्षेत्र स्थित जॉर्ज एवरेस्ट हाउस (आवासीय परिसर) और इससे करीब 50 मीटर दूर स्थित प्रयोगशाला (ऑब्जरवेटरी) का जीर्णोद्धार का काम लंबे अरसे के बाद फिर शुरू हो गया है। 172 एकड़ भू-भाग में फैले इस आवासीय परिसर और प्रयोगशाला का निर्माण कार्य अगले साल मार्च तक पूरा होने की संभावना है। उसके बाद यह बिल्कुल नये स्वरूप में नजर आएगा
उत्तराखंड पर्यटन संरचना विकास निवेश कार्यक्रम के तहत एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) पार्क का जीर्णोद्धार अरुण कंस्ट्रक्शंस कंपनी कर रही है। इसकी अनुमानित लागत 23 करोड़ 70 लाख रुपये है। इसकी शुरुआत पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने 18 जनवरी 2019 को की थी। यह कार्य 17 जून 2020 को खत्म होना था। लेकिन, लॉकडाउन की वजह से पूरा नहीं हो पाया।
इसमें कार्टियोग्राफिक म्यूजियम, आउट हाउस ,बैचलर हाउस, ऑबजरवेटरी, स्टार गेजिंग हटस, स्टार गेजिंग डॉमस, ओपन एयर थिएटर, पोर्टेबल टॉयलेट, पोर्टेबल फूड वैन, जार्ज एवरेस्ट पीक के लिए ट्रैक रूट का निर्माण शामिल है। कंपनी के इंजीनियर कुलदीप शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन के चलते तीन माह तक निर्माण कार्य बंद रहा।
याद आ गया अंग्रेजों का जमाना
सेंट जॉर्ज एवरेस्ट हाउस के मूल स्वरूप को बरकरार रखते हुए अंग्रेजों के जमाने में सीमेंट की जगह चक्की में पीस कर बनाए गए मिश्रण से जार्ज एवरेस्ट हाउस का पुन: निर्माण किया जा रहा है। चक्की में चूना, सुर्खी, मेथी, और उड़द की दाल को पानी के साथ पीसकर सीमेंट जैसा लेप बनाया जा रहा है। जिससे ईंटों को चिपकाने का काम किया जा रहा है। जार्ज एवरेस्ट हाउस के निर्माण को लेकर विशेष लाहौरी ईंट मंगवाई हैं।
मसूरी में रहते हुए जॉर्ज एवरेस्ट ने की थी कई चोटियों की खोज
बता दें की सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी का नाम माउंट एवरेस्ट रखा गया। उन्होंने जीवन का एक लंबा अर्सा मसूरी में गुजारा था। मसूरी स्थित सर जार्ज एवरेस्ट के घर और प्रयोगशाला में ही वर्ष 1832 से वर्ष 1843 के बीच भारत की कई ऊंची चोटियों की खोज हुई और उन्हें मानचित्र पर उकेरा। जार्ज वर्ष 1830 से 1843 तक भारत के सर्वेयर जनरल रहे।