मसूरी के क्यार कुली में अरबों रुपये की सरकारी भूमि पर कब्जे के पीछे की साजिश का पर्दाफाश होने लगा है। आईटीबीपी एकेडमी को जो जमीन अधिग्रहीत की गई थी, उसका खेवट नंबर तो था लेकिन अलग-अलग खसरा नंबर नहीं थे। इस जगह पर अभी तक भूमि बंदोबस्त भी नहीं हो पाया है। इसी का फायदा भूमाफिया ने उठाया।
आईटीबीपी एकेडमी की जमीन का खेवट नंबर 65 है। इसमें अलग-अलग खसरा नंबर का उल्लेख नहीं है। कई दशकों से यहां पर भूमि बंदोबस्त नहीं हो पाया है। विभागीय अफसरों के अनुसार इसकी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन बीच में कई पेच फंस रहे हैं। इसका फायदा जमीन बेचने वालों ने उठाया। उन्होंने खेवट नंबर 65 की जमीनों की रजिस्ट्री कर दी।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन प्रताप सिंह शाह के मुताबिक उसमें जमीन के अंश का उल्लेख तो है, लेकिन खसरा नंबरों का उल्लेख नहीं है। अंश के उल्लेख से यह तो पता चल जाता है कि किसके नाम कितनी जमीन की रजिस्ट्री हुई है लेकिन जिस जमीन की रजिस्ट्री हुई है, वह कहां पर है, इसका पता खसरा नंबर से ही चलता है। इसी की आड़ में पूरा खेल खेला गया।