महानगरों में भटक रहे पहाड़ के युवा
राज्य आंदोलनकारी देवी प्रसाद गोदियाल ने बताया कि अलग राज्य की मांग को लेकर उन्होंने वह जेल गए, पुलिस की लाठियां खाईं, उत्पीड़न सहा, लेकिन पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा, हमें उम्मीद थी कि अलग राज्य बनेगा तो हमारा जल, जंगल और जमीन बचेगी। लोगों को रोजगार मिलेगा, लेकिन बेरोजगारी और पलायन की समस्या जस की तस है। वरिष्ठ आंदोलनकारी जयप्रकाश उत्तराखंडी कहते हैं कि अलग राज्य बने लंबा समय हो गया, लेकिन राज्य की सरकारों ने आज तक पलायन और बेरोजगारी से निपटने के लिए कोई ठोस प्लान नही बनाया। जिसके चलते पहाड़ के युवा महानगरों में भटक रहे हैं।
क्या हुआ था उस दिन
अलग राज्य और खटीमा गोलीकांड के विरोध में आंदोलनकारी दो सितंबर 1994 को लंढौर और गांधी चौक से शांतिप्रिय तरीके से जुलूस निकाल रहे थे। दोनों गुट झूलाघर के पास पहुंचे ही थे, इसी दौरान गनहिल की पहाड़ी से किसी ने पत्थरबाजी कर दी। आंदोलनकारी कुछ समझ पाते कि पुलिस ने उनपर फायरिंग कर दी। इस गोलीकांड में आंदोलनकारी बेलमती चौहान, हंसा धनाई, राय सिंह बंगारी, मदन मोहन ममगाईं, बलवीर नेगी, धनपत सहित पुलिस अधिकारी उमाकांत त्रिपाठी शहीद हो गए।