समस्या सुनने पर उसका समाधान हो सकता है। चेताया कि जब तक सरकार लोगों की बात नहीं सुनती धरना जारी रहेगा। इस बीच महिलाओं ने कहा कि सीएए और एनआरसी का काला कानून वापस लेना होगा। मोदी सरकार इस मामले में तानाशाही रवैया अपना रही है। शाम पांच बजे के बाद से महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। ठंड के बावजूद महिलाएं मौके पर डटी रहीं।
शुक्रवार की शाम मुजाहिद चौक से लोगों ने कैंडल मार्च निकाला। हालांकि, पुलिस ने मार्च का कार्यक्रम स्थगित करने का अनुरोध किया लेकिन लोगों ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ नारा लगाते हुए पैदल मार्च ताज चौराहे तक निकाला। मोदी विरोधी नारे से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। कैंडल मार्च में सुहैल अहमद सिद्दीकी (पूर्व दायित्वधारी), पार्षद मोहम्मद गुफरान, इसलाम मिकरानी, हसनैन रजा, उवैस राजा, शराफत, पार्षद जीशान परवेज, शहनवाज मलिक, आदिल मिकरानी, आरिश अली, बिलाल खान, वसीम सिद्दीकी, अकील सिद्दीकी, आमिर अली, फैसल आदि शामिल रहे।