राज्य में मशरूम के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी की जाएगी, जिसके लिए पांच से अधिक ‘प्रोडक्शन जोन’ विकसित किए जाएंगे। इतना ही नहीं मशरूम की खेती के लिए इच्छुक महिलाओं को सरकारी खर्च पर बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाएगा। सहकारिता विभाग और हॉर्टीकल्चर विभाग मिलकर योजना का मसौदा तैयार करेंगे।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उक्त निर्देश मुख्यमंत्री आवास में सहकारिता विभाग की ओर से आयोजित मशरूम प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए जारी किए।
रवाई घाटी बनी मशरूम घाटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में मशरूम की खेती की अत्यधिक संभावनाएं हैं। यहां की जलवायु मशरूम उत्पादन के लिए काफी अनुकूल है। पर्वतीय क्षेत्रों में खाली मकानों में इसे आसानी से उगाया जा सकता है। यह ग्रामीणों की आजीविका और रोजगार का महत्वपूर्ण साधन हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने रवाईं घाटी को मशरूम घाटी घोषित किया। वहां इसकी खेती पर अच्छा काम हो रहा है। मुख्यमंत्री ने सौम्या फूड्स सहकारी समिति की दिव्या रावत की सराहना करते हुए कहा कि चमोली जिले में मशरूम उत्पादन में उनके द्वारा किया गया कार्य दूसरों को भी प्रेरित कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग द्वारा प्रदर्शित छोटे कोल्ड स्टोरेज का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर सचिव सहकारिता विजय ढौंडियाल, हॉर्टीकल्चर मिशन के निदेशक बीएस नेगी, सहायक निबंधक सहकारिता रमिंद्री मंद्रवाल, जिला सहायक निबंधक राजेश चौहान, सुमन कुमार आदि उपस्थित रहे।