सुनवाई के बाद वर्ष 2005 में अदालत ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। आरोपियों ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की। 2011 में हाईकोर्ट से तीनों आरोपियों की जमानत मंजूर हो गई।
जमानत पर छूटने के बाद दो आरोपियों राजीव उर्फ टालू और प्रदीप चौहान की मौत हो गई। हाईकोर्ट ने एडीजे कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी।
हत्याकांड में एक मात्र जीवित बचा मुजरिम गोविंद संबंधित न्यायालय में पेश नहीं हुआ। इस दौरान कोर्ट ने उसके खिलाफ कई वारंट भी जारी किए। वह छद्म नाम से हरिद्वार में रह रहा था।
रविवार को एसआई गणेश पांडेय ने मुखबिर की सूचना पर गोविंद को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया। उसे सोमवार को नैनीताल के एडीजे कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस के अनुसार फरार चल रहे गोविंद पर आईटीआई और काशीपुर थाने में कई मुकदमे दर्ज हैं। वह आईटीआई थाने का हिस्ट्रीशीटर बताया गया है।