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उत्तराखंड के 'टाइगर-003' की मौत बनी रहस्य

Sat, 19 Apr 2014 03:39 PM IST
अमर उजाला, रामनगर
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उत्तराखंड के तराई पश्चिमी वन प्रभाग की बैलपड़ाव रेंज के गैबुआ में मारा गया बाघ तराई का सबसे तगड़ा बाघ था। तुलनात्मक रूप से उस बाघ की लंबाई और वजन अन्य बाघों से ज्यादा थी। इसलिए वह तराई का सबसे तगड़ा बाघ माना गया था।
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वन्यजीव विशेषज्ञों ने मृत बाघ के शरीर पर बनी धारियों और कैमरे में कैद बाघ की धारियों से मिलान कर इसका पता लगाया है।

कैमरे में हुआ था कैद
2010 में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कैमरे में यह बाघ कैद हुआ था। तब इसे आरएमटी (रामनगर मेल टाइगर 003) नाम से दर्ज किया गया था।  

यह बाघ 14 अप्रैल को मारा गया था, लेकिन अब तक जंगलात के हाथ खाली हैं। अभी तक हत्यारों को पकड़ा नहीं जा सका है। फिलहाल इसके हत्यारे की तलाश को तीन टीमें बनाई गई हैं।
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शिकार की सूचना देने वाले को मिलेगा इनाम

मार्च 2014 में इसी बाघ को पश्चिमी चांदनी बीट के कैमरे में कैद किया गया था। डीएफओ राहुल ने बताया कि बाघ कैसे मरा, इसके खुलासे के लिए तीन टीमें बनाई गई है।

स्थानीय लोगों से भी मदद की अपील करते हुए सूचना देने वाले को उचित इनाम के साथ ही उसका नाम-पता गोपनीय रखा जाएगा।

राहुल ने बताया कि बाघ किसी छोटे जानवर के लिए लगाए गए फंदे पर धोखे से फंस गया होगा, उसी के बाद किसी स्थानीय व्यक्ति ने उसकी बेरहमी से हत्या की है। उनका दावा है कि हत्यारों को जल्द ही पकड़ा जाएगा।

...तो सूअर-हिरन के चक्कर में मारा गया बाघ!

गैबुआ में हुए बाघ के शिकार में ग्रामीणों और एक खास समूह के इर्द-गिर्द जंगलात की जांच सिमटी हुई है। अफसर मान रहे हैं कि अगर कोई पेशेवर गैंग होता तो वह लाखों की बाघ की खाल समेत दूसरे अंग छोड़कर नहीं जाता।

संभवत: सूअर, हिरन के चक्कर में लगाए गए फंदे में बाघ फंस गया, जिसे बाद में कानून के डर से लोगों ने मार गिराया। इसके अलावा तांत्रिक पूजा के एंगल को भी तलाशा जा रहा है।

जंगल के करीब ग्रामीण खेतों में बड़ी संख्या में फंदे लगाकर सूअर, हिरन का शिकार करते हैं। इसी के चक्कर में पिछले साल हेमपुर डिपो में फंदे में फंसकर एक टाइगर की मौत हुई थी। 2010 में फांटो रेंज में भी इसी तरह मरा बाघ मिला था।
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बहुत पुराना है फंदे का यह तरीका

फंदे का यह तरीका मैदान से लेकर पहाड़ तक आजमाया जाता है, जिस तरह गैबुआ में मरा बाघ मिला है, उसमें भी यही आशंका सबसे ज्यादा है कि सूअर, हिरन की जगह टाइगर फंस गया हो, जिसे जेल जाने के डर से लोगों ने मार दिया हो।

डीएफओ राहुल एवं वन संरक्षक सुरेंद्र मेहरा से लेकर मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं के अनुसार फंदे में फंसाकर बाघ को मारने की आशंका ज्यादा है। पेशेवर शिकारी के शामिल होने का चांस बेहद कम है। बहरहाल, सभी बिंदुओं पर जांच हो रही है।

खास पूजा का समय
पिछले साल 18 अक्तूबर को करीब इसी जगह पर एक बाघ को मारकर फेंका गया था। तरीका, जगह और सबसे बढ़कर ‘समय’ का इस घटना से मिलने से संदेह गहरा हुआ है। पिछले साल इस वक्त खास पूजा का समय था, जब टाइगर मरा मिला था। इस बार भी 14 अप्रैल को जब टाइगर मारा गया, तो भी ऐसा ही समय था।
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