हाईकोर्ट ने भी 22 अगस्त 2012 को निचली अदालत के उम्रकैद के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। इस दौरान फरीदा बेगम जमानत पर थी। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय खंड पीठ ने फरीदा बेगम और एक अन्य अभियुक्त मो. अशरफ की उम्रकैद को बरकरार रखा। कोर्ट ने चार अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
फरीदा बेगम ने अदालत में आत्मसमर्पण करने से पूर्व इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात कही है। फरीदा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हुए वह सरेंडर कर रही हैं लेकिन उनकी मुख्तयार से कोई रंजिश नहीं थी। उनके कार्यकाल में रहे एक सभासद ने प्रपंच रचकर उन्हें इस मुकदमे में फंसाया है। उक्त सभासद उनसे गलत ढंग से बिल पास कराने का दबाव डालता था। उन्होंने कहा कि जिस समय मुख्तयार की हत्या को अंजाम दिया गया, उस समय वह कुछ सभासदों के साथ अपने घर पर मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि इस सजा के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगी। उन्हें इंसाफ मिलने का पूरा भरोसा है।