1995 में यूपी में हुई एक मुठभेड़ के दौरान उसे गोली भी लगी थी। 2012 में विधानसभा चुनाव लड़ चुके मुन्ना बजरंगी खनन के कारोबार में भी हस्तक्षेप करने लगा था। सुपारी लेकर हत्या कराने के लिए मशहूर हो चुके मुन्ना बजरंगी का खौफ राजनीतिक गलियारों में सुनाई देने लगा था।
सूत्रों की मानें तो भाजपा के कई विधायक उसके निशाने पर थे। ऐसे में मुन्ना की हत्या के पीछे राजनीतिक कारणों से इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं इस काम को अंजाम देने में संदेह के घेरे में आ रहे कुख्यात सुनील राठी पर जब यह इल्जाम साबित होगा तो निश्चित रूप से राजनीतिक दृष्टिकोण से कहीं न कहीं उसकी हैसियत भी बनेगी।
ऐसे में कहीं सुनील राठी का अपराध के साथ-साथ राजनीतिक कद न बढ़ जाए। इसके लेकर पीएचक्यू के अधिकारियों की बेचैनी भी बढ़ेगी। क्योंकि खासतौर से हरिद्वार जिले में राठी पहले से ही जेल में रहकर नेटवर्क चलाता रहा है। ऐसे में उसके सुरक्षित नेटवर्क को भेदना पहले से ज्यादा मुश्किल होगा।