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सैनिकों के लिए भारतीय सेना का नया फरमान, नहीं रख सकेंगे मोबाइल

Fri, 03 Mar 2017 10:55 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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सैनिकों के स्मार्टफोन, पेन ड्राइव सहित सभी मल्टीमीडिया डिवाइस रखने पर सेना ने रोक लगा दी है।
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फील्ड एरिया में तैनात सैनिक स्मार्ट फोन समेत किसी भी तरह का ऐसा मोबाइल फोन इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे, जिनसे कोई वीडियो, ऑडियो सहित किसी भी तरह की जानकारी सोशल मीडिया या कहीं और भेजी जा सके। हालांकि इस आदेश की अधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

सेना में कार्यरत विभिन्न स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों से मिली जानकारी से यह बात सामने आई है कि सैन्यकर्मी अपने कार्यस्थल पर मल्टीमीडिया डिवाइस का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
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इस बाबत कोई औपचारिक आदेश नहीं

indian army
यह भी जानकारी मिली है कि कोई विवाद न हो इसलिए इस बाबत कोई औपचारिक आदेश नहीं जारी किया गया है, बल्कि मौखिक तौर पर कमांडिग अफसरों को इस संबंध में जारी पुराने आदेशों पर सख्ती से अमल कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

इस आदेश की पुष्टि के लिए अमर उजाला ने कुछ सैन्यकर्मियों से भी मुलाकात की। कुछ बोले, कुछ नहीं बोले, मगर उनके हाथों में स्मार्टफोन की बजाए छोटे साधारण फोन सेटों ने मोटे तौर पर इस सच्चाई की पुष्टि कर दी।

हाल ही में बीएसएफ के जवान तेज बहादुर यादव और 42 इंफ्रेंट्री ब्रिगेड देहरादून में तैनात लांसनायक यज्ञ प्रताप सिंह के वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गए थे।

जवानों वीडियो हो चुके हैं वायरल

तेजबहादुर के बाद मां ने भी खोला मोर्चा
बीएसएफ के जवान तेज बहादुर यादव ने अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, जबकि लांसनायक यज्ञ प्रताप सिंह ने वीडियो के जरिये जवानों से अधिकारियों के घरों में सहायक के रूप में काम लिए जाने का आरोप लगाया था।

दोनों ही मामलों में बीएसएफ और आर्मी ने तत्काल कार्रवाई की थी, लेकिन इन घटनाओं से सभी सेनाओं के सामने एक नई चुनौती पेश आई। लिहाजा, इंडियन आर्मी ने ऐसी सभी मल्टीमीडिया डिवाइस पर रोक लगा दी है, जिससे किसी भी तरह की तस्वीर, वीडियो या ऑडियो बाहर जा सके।

सेना के एक अफसर ने बताया कि हाल ही में यह आदेश आए हैं कि फील्ड में तैनात कोई भी सैनिक विंडोज या एंड्रायड स्मार्ट फोन, मेमोरी कार्ड, पैन ड्राइव, ब्लूटूथ वाला फोन, कैमरे वाला फोन, कॉल रिकॉर्डिंग वाला फोन नहीं रख सकेगा। एक अधिकारी ने यह भी बताया कि इस संबंध में पहले से ही रोक थी, मगर कोई दुरुपयोग सामने नहीं आया था, लिहाजा आदेश को टेकेन फॉर ग्रांटेड लिया जा रहा था।

हाल की घटनाओं के मद्देनजर रोक पर सख्ती से अमल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर परिजनों से बात करने के लिए फोन की जरूरत है तो साधारण मोबाइल फोन रखा जा सकता है। सभी सैनिकों के पास इस तरह की डिवाइस की चेकिंग भी की जा रही है। 
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आईएमए में सोशल साइट्स पर रोक

आईएमए में पीओपी - फोटो : अमरउजाला
वर्ष 2013 में भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून ने मोबाइल फोन पर सोशल नेटवर्किंग साइट्स प्रतिबंधित कर दी थी। अकादमी ने ट्रेनिंग संबंधित जानकारी और तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद यह निर्णय लिया था।

इसके बाद अकादमी ने इंटरनेट सिस्टम पर नकेल कसने के लिए अपना इंटरनेट सिस्टम विकसित किया है, ताकि कोई भी जानकारी किसी भी स्तर से (फोन/लैपटॉप/डेस्कटॉप) से बाहर न जा सके।

सोशल मीडिया नहीं, सेना में खुद की सुनवाई की परंपरा 
सेना में किसी भी सैनिक या अधिकारी के लिए अपनी शिकायत और समस्या बताने को बाकायदा प्रक्रिया है। अब अगर एक सैनिक आज खाने की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर रहा है तो कल वह कोई बेहद सीक्रेट बात भी मोबाइल के माध्यम से बाहर भेज सकता है। वैसे भी सेना के मामले की बात करें तो यहां सोशल मीडिया की कोई जरूरत ही नहीं है। मेरे ख्याल से सेना की सभी परंपराएं पर्याप्त हैं किसी भी सैनिक की सुनवाई के लिए। यहां तो आर्मी चीफ बिपिन रावत खुद कह चुके हैं कि किसी को कोई समस्या हो तो सीधे उनसे भी बात कर सकते हैं। 
- ले. जन गंभीर सिंह नेगी (सेवानिवृत्त), पूर्व कमांडेंट, आईएमए
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