विदेशों में वेधशालाओं और खगोलीय संस्थानों में उनकी यात्राओं से थाई और अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ताओं के बीच व्यापक सहयोग हुआ। एरीज और एनएआरआईटीके बीच सहयोग की शुरुआत 2012 में डा. अनिल के पांडे की ओर से की गई। नवंबर 2018 में एरीज और एनएआरआईटी के बीच एमओयू हुआ।
एरीज और एनएआरआईटी के अध्ययन पर आधारित अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में कई सहयोगी शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। वर्तमान में भी डीएसटी, भारत और थाईलैंड की ओर से वित्त पोषित एक अनुसंधान परियोजना की अगुवाई डॉ. सौरभ शर्मा कर रहे हैं जिसमें कम द्रव्यमान वाले सितारों के निर्माण और विकास का अध्ययन चल रहा है। एरीज से तीर्थेंदु सिन्हा, डॉ. सौरभ शर्मा और डॉ. अनिल पांडे ने एनएआरआईटी की टीम के साथ एक युवा ओपन स्टार क्लस्टर की जांच की।
इसमें 1.3 मीटर देवस्थल फास्ट ऑप्टिकल टेलीस्कोप (डीएफओटी), 0.7 मीटर थाई रोबोटिक टेलीस्कोप, टीएओ-जीएओ, गाओ मेई ग्यु वेधशाला के साथ 2-170 क्षेत्र और थाई नेशनल ऑब्जर्वेटरी (टीएनओ) के 0.5 मीटर दूरबीन का उपयोग किया गया। प्रेक्षणों ने एसएच 2-170 क्षेत्र में 71 चरों की खोज की। इस नमूने में, 49 चर नवजात तारे पाए गए। इन नए जन्मे सितारों का अध्ययन पीएमएस सितारों की प्रकृति की समझ को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण है। इन निष्कर्षों पर एक विस्तृत पेपर रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी (यूके) के प्रतिष्ठित जर्नल के फरवरी अंक में प्रकाशित हुआ है।