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मदर्स डे 2021 : कोरोना के दौरान फील्ड और घर की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहीं सिटी मजिस्ट्रेट व सरिता डोभाल

Sun, 09 May 2021 04:05 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

 सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान भी इन दोनों ही जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। रोजाना सुबह ड्यूटी पर निकलते वक्त उनकी 10 साल की बिटिया स्कंदा हाथ हिलाकर उन्हें विदा करती है। कहती है मां अपना ख्याल रखना।
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सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक तरफ कोरोना नियंत्रण व शहर में व्यवस्थाएं बनाने का जिम्मा और दूसरी तरफ परिवार को संभालने की जिम्मेदारी। सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान भी इन दोनों ही जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। रोजाना सुबह ड्यूटी पर निकलते वक्त उनकी 10 साल की बिटिया स्कंदा हाथ हिलाकर उन्हें विदा करती है। कहती है मां अपना ख्याल रखना।

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कोरोना के कारण इन दिनों प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बहुत अधिक बढ़ गया है। ऐसे में महिला अफसरों के लिए परेशानी ज्यादा है, क्योंकि उन्हें घर की जिम्मेदारी भी संभालनी होती है। ऐसी ही एक महिला अफसर हैं कुश्म चौहान, जो राजधानी में सिटी मजिस्ट्रेट के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। सुबह से देर शाम तक दफ्तर, फील्ड, मीटिंग, वीसी, निरीक्षण, व्यवस्थाएं जुटाना और बनाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। उसके बाद जब थककर वह घर पहुंचती हैं तो बिटिया की एक मुस्कान उनकी सारी थकान उतार देती हैं।
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उन्होंने बताया कि रोजाना फील्ड में काम करते हुए खतरा बना रहता है। फिर जब घर जाते हैं तो परिवार की भी चिंता होती है। उन्होंने बताया कि पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली स्कंदा बार-बार अपनी कॉपी लेकर उनके पास आती है और पूछती है, मैंने कैसा लिखा। उन्होंने बताया कि कोरोना की चर्चा रोजाना घर पर भी होती है। इससे स्कंदा को भी मेरी चिंता लगी रहती है। सुबह घर से निकलते वक्त वह रोजाना मुझे अपना ध्यान रखने की सलाह जरूर देती है।

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दो बच्चों की जिम्मेदारी के साथ पूरे शहर का जिम्मा संभाले है मां 

देहरादून की एसपी सिटी सरिता डोभाल का घर पर दो बच्चे भविका और अर्नव हर रोज इंतजार करते हैं। हर रात को इंतजार के बाद सो जाते हैं। कारण है कि उनके ऊपर सिर्फ भविका और अर्नव का ही नहीं बल्कि पूरे शहर का जिम्मा है।

अर्नव कक्षा सात में पढ़ता है जबकि भविका कक्षा दो में पढ़ती है। सरिता डोभाल के पति परमेंद्र डोभाल इस वक्त हरिद्वार देहात यानी रुड़की में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

मदर्स डे पर यदि बात की जाए तो अर्नव और भविका की मां बखूबी सारी जिम्मेदारियों को इस वक्त अकेले संभाल रही हैं। फिर चाहे वाहे उन दोनों की परवरिश हो या फिर पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा। 
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